बाली/रांची: इंडोनेशिया के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बाली में 30वें इंटरनेशनल होम्योपैथिक चिकित्सा सेमिनार का सफल आयोजन किया गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध कैंट होम्योपैथिक फार्मास्युटिकल संस्थान की ओर से आयोजित इस सेमिनार में भारत, इंडोनेशिया समेत विभिन्न देशों के करीब 85 होम्योपैथिक चिकित्सकों ने हिस्सा लिया।
सेमिनार में चिकित्सकों ने होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली के माध्यम से जटिल, पुराने और असाध्य रोगों के उपचार तथा अनुसंधान से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कैंट होम्योपैथिक फार्मास्युटिकल के प्रबंधक डॉ. सोमनाथ देव ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने संस्थान द्वारा निर्मित विभिन्न होम्योपैथिक दवा उत्पादों की गुणवत्ता और उपचार संबंधी अनुभवों पर चर्चा की।
डॉ. यूएस वर्मा को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड
सेमिनार में रांची, झारखंड के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. यूएस वर्मा को होम्योपैथिक चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। उन्हें शॉल पहनाकर भी सम्मानित किया गया।
डॉ. यूएस वर्मा करीब तीन दशक तक रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी रहे हैं। वर्तमान में वे कचहरी चौक के निकट डिप्टी पाड़ा स्थित यूएस पॉली क्लीनिक एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर के निदेशक हैं। डॉ. वर्मा ने एलोपैथिक और होम्योपैथिक दोनों चिकित्सा पद्धतियों में शिक्षा प्राप्त की है।
एलोपैथी और होम्योपैथी की भूमिका पर रखे विचार
सेमिनार को संबोधित करते हुए डॉ. यूएस वर्मा ने कहा कि एलोपैथिक चिकित्सा आपातकालीन और जीवनरक्षक उपचार के साथ-साथ सर्जरी के क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण है। वहीं, उनके अनुसार पुराने और बार-बार होने वाले जटिल रोगों के उपचार में होम्योपैथिक चिकित्सा की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने सायटिका, जोड़ों के दर्द, मधुमेह, लीवर, किडनी और हृदय से जुड़ी बीमारियों सहित विभिन्न पुराने रोगों के उपचार में होम्योपैथिक चिकित्सा के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने फाइब्रॉइड तथा बच्चों और बुजुर्गों में होने वाली विभिन्न बीमारियों के उपचार पर भी अपने विचार रखे।
डॉ. वर्मा के अनुसार, उन्होंने चिकित्सकीय जीवन में हजारों मरीजों के उपचार का अनुभव प्राप्त किया है। इनमें कोरोना वायरस संक्रमण, लकवा, लीवर, किडनी, हृदय तथा अन्य पुराने और जटिल रोगों से जुड़े मरीज शामिल रहे हैं।
बिहार के चिकित्सकों को भी मिला सम्मान
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर डॉ. यूएस वर्मा ने बिहार के गया से डॉ. वीरेंद्र कुमार, डॉ. चंद्रशेखर और डॉ. अर्चना कुमारी तथा बाराचट्टी के डॉ. ब्रजेश कुमार को होम्योपैथिक चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उत्कृष्ट चिकित्सक अवार्ड से सम्मानित किया। सभी को शॉल पहनाकर सम्मानित किया गया।
डॉ. यूएस वर्मा को इससे पहले भी चिकित्सा क्षेत्र में योगदान के लिए झारखंड सेवा रत्न अवार्ड, राष्ट्रीय सेवा रत्न अवार्ड, विश्व चिकित्सा सेवा रत्न अवार्ड और मिलेनियम आइकन अवार्ड समेत कई सम्मान मिल चुके हैं।
भारत सहित कई देशों के चिकित्सकों ने लिया हिस्सा
सेमिनार में भारत की ओर से डॉ. वीरेंद्र कुमार, डॉ. सिद्धार्थ गौरव, डॉ. संतन कुमार, डॉ. सुरभि कुमारी, डॉ. सोनी कुमारी, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. रौशन कुमार, डॉ. एसके वर्मा, डॉ. उपेंद्र कुमार और डॉ. अनंत कुमार समेत कई चिकित्सकों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा इंडोनेशिया और अन्य देशों के जाने-माने होम्योपैथिक चिकित्सक भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
सिंगापुर और मलेशिया में भी दिया व्याख्यान
बाली से वापसी के दौरान डॉ. यूएस वर्मा ने सिंगापुर और मलेशिया में होम्योपैथिक चिकित्सकों को चिकित्सा प्रणाली में हुए नए शोध और विभिन्न रोगों के उपचार से जुड़े विषयों पर व्याख्यान दिया। इन कार्यक्रमों का आयोजन कैंट होम्योपैथिक फार्मास्युटिकल के सौजन्य से किया गया। इसकी जानकारी डॉ. यूएस वर्मा ने दी।






