रांची, 19 अगस्त । झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की 22 नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द किए जाने के फैसले के बाद चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। खासकर जेएसएससी-सीजीएल के जरिए विभिन्न पदों पर नियुक्त कर्मचारी सरकार के फैसले से नाराज होकर सड़क पर उतर आए हैं। बुधवार को रांची स्थित झारखंड मंत्रालय (प्रोजेक्ट भवन) के बाहर बड़ी संख्या में प्रभावित कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया और सरकार से परीक्षा रद्द करने संबंधी अधिसूचना वापस लेने की मांग की।
भारी बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारी प्रोजेक्ट भवन के बाहर डटे रहे। इस दौरान कर्मचारियों ने ‘न्याय दो या फांसी दो’, ‘बिरसा मुंडा अमर रहें’ और ‘मुख्यमंत्री हाय-हाय’ जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
‘एक झटके में सड़क पर ला दिया’
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा पास करने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियुक्ति हासिल की थी और लंबे समय से विभिन्न सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे थे। कई कर्मचारी ऐसे हैं, जो कल तक प्रोजेक्ट भवन और राज्य सरकार के अलग-अलग कार्यालयों में काम कर रहे थे, लेकिन परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के बाद अचानक उनकी नौकरी और भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है।
एक आंदोलनकारी ने कहा कि सरकार ने उनके साथ अन्याय किया है। उनके मुताबिक, जिस प्रोजेक्ट भवन में वे कल तक कर्मचारी के तौर पर काम कर रहे थे, आज उसी के बाहर उन्हें अपनी नौकरी बचाने के लिए प्रदर्शन करना पड़ रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार ने पूरी परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य को ही संकट में डाल दिया।
22 परीक्षाएं रद्द करने के फैसले से बढ़ा विवाद
झारखंड सरकार ने सीआईडी और एसआईटी की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर जेपीएससी और जेएसएससी की ओर से आयोजित कुल 22 परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया है। इस फैसले से बड़ी संख्या में पहले से चयनित और नियुक्त अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं।
इनमें जेएसएससी-सीजीएल के जरिए नियुक्त 1,932 कर्मचारी भी शामिल हैं। इसके अलावा 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा के जरिए नियुक्त अधिकारी और कई अन्य भर्ती परीक्षाओं से चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां भी प्रभावित हुई हैं।
सरकार का तर्क है कि भर्ती परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं की गंभीरता को देखते हुए पूरी प्रक्रिया की समीक्षा जरूरी है। वहीं, नियुक्त कर्मचारी इसे अपने साथ अन्याय बता रहे हैं।

‘हमारी नियुक्ति अदालत के निर्देशों के तहत हुई’
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि उनकी नियुक्ति सिर्फ आयोग की प्रक्रिया के आधार पर नहीं हुई, बल्कि कई मामलों में न्यायिक प्रक्रिया और अदालतों के निर्देशों के बाद नियुक्तियां पूरी हुई थीं। ऐसे में अब पूरी परीक्षा को रद्द कर देना उनके लिए समझ से परे है।
कर्मचारियों का कहना है कि यदि परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई थी तो दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों या अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए थी। लेकिन पूरी परीक्षा रद्द करने से उन अभ्यर्थियों को भी नुकसान हो रहा है, जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा पास की और नियुक्ति हासिल की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे इस मामले को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे कानूनी लड़ाई के साथ-साथ लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन भी जारी रखेंगे।
‘मांग पूरी होने तक यहीं बैठे रहेंगे’
कर्मचारियों ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी नौकरी और सेवा की स्थिति पर सरकार स्पष्ट फैसला नहीं लेती, वे प्रोजेक्ट भवन के बाहर से नहीं हटेंगे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को पहले से नियुक्त कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए तत्काल रास्ता निकालना चाहिए।
एक आंदोलनकारी ने कहा कि वे अपनी नौकरी वापस लेकर रहेंगे। उनके अनुसार, सरकार के फैसले ने हजारों परिवारों की रोजी-रोटी और भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
बारिश में भी जारी रहा प्रदर्शन
रांची में लगातार बारिश के बीच भी कर्मचारी प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन करते रहे। खराब मौसम के बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ। कर्मचारी हाथों में तख्तियां और पोस्टर लेकर सरकार से फैसला वापस लेने की मांग करते नजर आए।
आंदोलन में केवल जेएसएससी-सीजीएल के जरिए नियुक्त कर्मचारी ही नहीं, बल्कि 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के जरिए सफल होकर विभिन्न पदों पर पहुंचे अधिकारी और पदाधिकारी भी शामिल हैं। इससे सरकार के फैसले के खिलाफ प्रभावित अभ्यर्थियों और कर्मचारियों की नाराजगी का दायरा बढ़ता दिखाई दे रहा है।

आगे टकराव बढ़ने के आसार
एक तरफ सरकार नियुक्ति परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम उठा रही है, वहीं दूसरी ओर पहले से नियुक्त अभ्यर्थी अपने भविष्य को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में सरकार के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि दोषियों पर कार्रवाई की जाए, लेकिन पूरी परीक्षा और नियुक्तियों को रद्द कर निर्दोष चयनित अभ्यर्थियों को सजा न दी जाए। कर्मचारियों ने कहा है कि जब तक सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट और संतोषजनक निर्णय नहीं लेती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।






