JSSC फील्ड वर्कर भर्ती परीक्षा में अव्यवस्था का आरोप, 75% अभ्यर्थी नहीं दे सके एग्जाम

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रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की फील्ड वर्कर भर्ती परीक्षा ने लाखों अभ्यर्थियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। दो साल के लंबे इंतजार के बाद आयोजित इस परीक्षा में ऐसी अव्यवस्थाएं सामने आईं कि करीब 75 प्रतिशत उम्मीदवार परीक्षा दे ही नहीं सके

3 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों की उम्मीदें टूटी

रिपोर्ट के मुताबिक, JSSC ने वर्ष 2024 में 510 फील्ड वर्कर पदों पर भर्ती निकाली थी, जिसके लिए 3 लाख से अधिक युवाओं ने आवेदन किया था।

करीब दो साल बाद 19 जुलाई को परीक्षा आयोजित की गई, लेकिन खराब प्रबंधन के कारण अधिकांश अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र तक पहुंच ही नहीं पाए।

सैकड़ों किलोमीटर दूर दिए गए परीक्षा केंद्र

कई उम्मीदवारों को उनके घर से 300 से 550 किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए।

इतनी लंबी दूरी, कम समय और सीमित संसाधनों के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो सके।

एडमिट कार्ड में भारी गड़बड़ी

अव्यवस्था का आलम यह रहा कि कुछ उम्मीदवारों को एडमिट कार्ड की सूचना परीक्षा खत्म होने के बाद ईमेल के जरिए मिली।

इस तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही ने अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।

अभ्यर्थियों की आपबीती

पूर्वी सिंहभूम के बहरागोड़ा की रहने वाली एक अभ्यर्थी को हजारीबाग में परीक्षा केंद्र मिला, जो उनके घर से 300 किलोमीटर से अधिक दूर था।

उन्हें परीक्षा से महज तीन-चार दिन पहले केंद्र की जानकारी मिली, जिससे वहां तक पहुंचना और ठहरने की व्यवस्था करना संभव नहीं हो पाया।

उन्होंने बताया कि उन्होंने परीक्षा की अच्छी तैयारी की थी, लेकिन व्यवस्थागत खामियों के कारण उनका सपना टूट गया।

पारदर्शिता और प्रबंधन पर सवाल

इस घटना ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे इंतजार के बाद भी यदि ऐसी अव्यवस्था हो, तो यह युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

कार्रवाई की मांग तेज

अभ्यर्थियों और विभिन्न संगठनों ने परीक्षा प्रक्रिया की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

साथ ही, कई उम्मीदवारों ने परीक्षा को रद्द कर पुनः आयोजित करने की भी मांग उठाई है।


JSSC भर्ती परीक्षा में सामने आई गड़बड़ियों ने एक बार फिर सरकारी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो युवाओं का भरोसा और कमजोर हो सकता है।

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