रांची, 05 सितंबर । झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा में कथित अनियमितता के मामले में गिरफ्तार राज्य के पूर्व मुख्य सचिव और JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को बड़ा झटका लगा है। रांची की CID विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने मामले की गंभीरता और जांच एजेंसी की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों को देखते हुए फिलहाल उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया। जमानत नहीं मिलने के बाद एल खियांग्ते की न्यायिक हिरासत जारी रहेगी।
जमानत के विरोध में CID ने पेश की करीब 1000 पन्नों की केस डायरी
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान CID ने बचाव पक्ष की दलीलों का जोरदार विरोध किया। जांच एजेंसी ने अदालत के समक्ष करीब 1000 पन्नों की केस डायरी पेश की। CID का कहना है कि जांच के दौरान आरोपियों के खिलाफ कई अहम साक्ष्य सामने आए हैं और मामले की जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है।
परीक्षा कराने वाली एजेंसियों से कमीशन लेने का भी आरोप
CID ने अदालत में तर्क दिया कि JPSC परीक्षा में कथित अनियमितता का मामला बेहद गंभीर है। जांच के दौरान परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों से कथित तौर पर कमीशन के रूप में मोटी रकम लिए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। जांच एजेंसी ने आशंका जताई कि आरोपियों को जमानत मिलने पर जांच प्रभावित हो सकती है।
24 से अधिक आरोपी गिरफ्तार
JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर CID ने कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया है। इस हाईप्रोफाइल मामले में अब तक 24 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। जांच एजेंसी लगातार आरोपियों से पूछताछ करने के साथ मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
करीब एक साल JPSC के अध्यक्ष रहे खियांग्ते
एल खियांग्ते करीब एक साल तक JPSC के अध्यक्ष पद पर रहे थे। मामले में JPSC में लंबे समय तक कार्यरत रहीं श्वेता गुप्ता और अभय तिवारी समेत कई आरोपी पहले से न्यायिक हिरासत में हैं। जांच में अभय तिवारी और उनके परिवार के कई सदस्यों को JPSC की अलग-अलग परीक्षाओं के जरिए नियुक्तियां मिलने की बात भी सामने आई है। इसी आधार पर CID मामले की विभिन्न कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं खियांग्ते
CID विशेष अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद एल खियांग्ते के पास अब झारखंड हाईकोर्ट का रुख करने का विकल्प है। फिलहाल अदालत के आदेश के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा। मामले में आगे की जांच और सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।






