बिहार बंद के दौरान राहुल-तेजस्वी ने उठाए चुनाव आयोग पर सवाल, कहा- EC अब तक जवाब देने में असमर्थ

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DESK : केंद्रीय श्रमिक संगठनों की देशव्यापी हड़ताल के बीच बिहार में INDIA गठबंधन द्वारा चक्का जाम का आयोजन किया गया। इस बंद का मुख्य कारण मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ विरोध है, जिसे लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बंद के समर्थन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, राजद नेता तेजस्वी यादव और भाकपा माले महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य एक ही ट्रक पर सवार होकर सड़कों पर उतरे। तीनों नेताओं ने संयुक्त रूप से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि आयोग बार-बार अधिसूचना बदल रहा है, जिससे उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।

तेजस्वी यादव ने तीखा हमला करते हुए कहा गरीबों का पहले नाम वोटर लिस्ट से काटेंगे, फिर राशन बंद करेंगे। आयोग कंफ्यूज है और सरकार के दबाव में काम कर रहा है अब तक हमारे किसी सवाल का जवाब नहीं आया है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नीतीश कुमार की सरकार पूरी तरह से निष्क्रिय हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी बंद में शामिल होने के लिए सुबह पटना एयरपोर्ट पहुंचे, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। राहुल गांधी ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ मतदाता सूची की नहीं बल्कि लोकतंत्र बचाने की है, उन्होंने INDIA गठबंधन के साथ मिलकर सड़कों पर उतरने का आह्वान किया।

बिहार बंद का व्यापक असर राज्यभर में देखा गया, राजद कार्यकर्ताओं और INDIA गठबंधन के नेताओं द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों, रेल पटरियों और स्टेशनों पर प्रदर्शन किया गया।

पप्पू यादव के समर्थकों ने सचिवालय हॉल्ट पर रेल ट्रैक जाम कर प्रदर्शन किया।

कटिहार में एनएच-31 और एसएच-77 को बंद समर्थकों ने जाम कर दिया।

पटना के मनेर में NH-30 पर आगजनी कर रास्ता रोका गया।

दरभंगा में बिहार संपर्क क्रांति और नमो भारत ट्रेन को रोका गया।

आरा के बिहिया स्टेशन पर श्रमजीवी और विभूति एक्सप्रेस को रोका गया।

जहानाबाद, वैशाली और आरा में भी ट्रेनों का चक्का जाम कर विरोध जताया गया।

रेलवे ने रेल सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए आरपीएफ और स्थानीय पुलिस बलों की तैनाती की है, हालांकि कई स्थानों पर यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। INDIA गठबंधन का कहना है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान आयोग जिन 11 दस्तावेजों की मांग कर रहा है वे गरीब तबके के पास उपलब्ध नहीं हैं, जिससे करोड़ों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। विपक्षी नेताओं ने इसे सुनियोजित साजिश करार दिया है।

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