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केंद्रीय बजट 2026–27: सीमित आवंटन के बावजूद बंगाल के लिए कई अहम योजनाओं का ऐलान

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कोलकाता। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 2026-27 वित्त वर्ष के लिए आम बजट पेश किया। विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले आए इस बजट में पश्चिम बंगाल के लिए भले ही बहुत बड़े और आकर्षक ऐलान नहीं किए गए हों, लेकिन बजट की कई योजनाओं से राज्य का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ाव देखने को मिला। यह पहलू पिछले बजट की तुलना में एक अहम बदलाव माना जा रहा है।

पिछले वर्ष जब संसद में आम बजट पेश किया गया था, तब ऐसा महसूस हुआ था मानो बिहार के लिए विशेष बजट भाषण दिया जा रहा हो। उस समय बिहार को कई हाई-प्रोफाइल और सुर्खियों में रहने वाली परियोजनाएं मिली थीं और कुल मिलाकर लगभग 58,900 करोड़ की योजनाओं की घोषणा की गई थी। इसके उलट इस बार पश्चिम बंगाल के मामले में केंद्रीय वित्त मंत्री ने अपेक्षाकृत संयमित रुख अपनाया और सीमित घोषणाएं कीं।

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विधानसभा चुनाव से पहले पेश किए गए इस बजट में पश्चिम बंगाल के लिए तीन प्रमुख घोषणाएं की गई हैं। इनमें सिलीगुड़ी–वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, डानकुनी–सूरत फ्रेट कॉरिडोर और इंटीग्रेटेड ईस्ट-कोस्ट कॉरिडोर के तहत दुर्गापुर में औद्योगिक कॉरिडोर का विकास शामिल है।

बजट की अन्य योजनाओं से भी पश्चिम बंगाल को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। बायोफार्मा शक्ति परियोजना के तहत देश में सात नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के आधुनिकीकरण की घोषणा की गई है, जिनमें से एक संस्थान की शाखा कोलकाता में स्थित है। इससे राज्य में उच्च शिक्षा और शोध को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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इसके अलावा वस्त्र उद्योग को लेकर कई अहम घोषणाएं की गई हैं। जूट, खादी, हैंडलूम और हस्तशिल्प पर विशेष जोर दिया गया है और मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। चूंकि इन क्षेत्रों से पश्चिम बंगाल के बड़ी संख्या में लोग जुड़े हुए हैं, इसलिए राज्य को इससे सीधा लाभ मिल सकता है।

केंद्रीय बजट में देश के 200 पारंपरिक औद्योगिक क्लस्टरों के पुनरुद्धार की भी घोषणा की गई है। हालांकि, इसमें किसी राज्य का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन संबंधित जानकारों का मानना है कि इस योजना से पश्चिम बंगाल भी लाभान्वित हो सकता है।

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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों पर भी बजट में खास जोर दिया गया है। लघु उद्योग विकास फंड के लिए 10 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है और सस्ती दर पर उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कही गई है। चूंकि पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा एमएसएमई पर आधारित है, इसलिए इस प्रावधान से राज्य को फायदा मिलने की संभावना है।

बजट में यह भी घोषणा की गई है कि हर जिले में लड़कियों के लिए एक छात्रावास बनाया जाएगा, जहां विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे बालिकाओं की उच्च शिक्षा को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

इसके साथ ही मत्स्य पालन और पशुपालन क्षेत्र के लिए कई कदम उठाने की बात कही गई है। सरकार 500 रिजर्वायर और अमृत सरोवर बनाने की योजना बना रही है, जिससे तटीय इलाकों के मछुआरों को लाभ मिलेगा। पशुपालकों के लिए सस्ते ऋण की सुविधा भी देने का आश्वासन दिया गया है।

पूर्वी भारत के पांच राज्यों में पांच पर्यटन केंद्र विकसित करने की घोषणा भी बजट का अहम हिस्सा रही। इसके अलावा चार हजार इलेक्ट्रिक बसें चलाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

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