—भाजपा ने एसआईटी जांच की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
रांची, 27 जुलाई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड के कथित हजारों करोड़ रुपये के ट्रेजरी घोटाले को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अपने चहेते वरिष्ठ अधिकारियों को बचाने का प्रयास कर रही है।
सोमवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रतुल शाहदेव ने कहा कि राज्य के वित्त मंत्री खुद स्वीकार कर चुके हैं कि पिछले कुछ वर्षों के लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के सरकारी धन का हिसाब नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में सरकार की कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित है, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों को बचाया जा रहा है।
एसआईटी की जांच पर उठाए सवाल
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) में ऐसे अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिनके कार्यकाल के दौरान संबंधित जिलों में ट्रेजरी घोटाले हुए थे।
उन्होंने कहा कि एसआईटी के दो सदस्य हजारीबाग और बोकारो में पुलिस अधीक्षक रह चुके हैं, जहां इस मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। ऐसे में उनसे निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना मुश्किल है।
ट्रेजरी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि चारा घोटाले के मामलों में सीबीआई की विशेष अदालत ने ट्रेजरी अधिकारियों की भूमिका को स्वीकार करते हुए उन्हें सजा सुनाई थी, जिसे बाद में उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने भी बरकरार रखा।
उन्होंने झारखंड वित्त नियमावली और झारखंड कोषागार संहिता का हवाला देते हुए कहा कि सरकारी धन की निकासी में डीडीओ और ट्रेजरी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों का दायित्व है कि वे बिल, दस्तावेज और हस्ताक्षरों की जांच करें तथा किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका होने पर भुगतान रोकें।
सीआईडी पर भी लगाए आरोप
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सीआईडी ने अपनी चार्जशीट में सभी डीडीओ और ट्रेजरी अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी और उनके नाम तक शामिल नहीं किए। उन्होंने कहा कि चाईबासा ट्रेजरी घोटाले में भी सीआईडी ने केवल निचले स्तर के कर्मियों को आरोपी बनाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में जिन मामलों को दबाना होता है, उनकी जांच सीआईडी को सौंप दी जाती है।
ऑडिट रिपोर्ट को लेकर भी सरकार पर निशाना
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि राज्य सरकार ने स्पेशल ऑडिट कराने की अनुशंसा प्रधान महालेखाकार (प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल) से की थी। इसके बाद 11 मई, 2026 को गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर 87 प्रकार के दस्तावेज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद सरकार ने जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उत्पाद सचिव के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने अब तक अपनी जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी है।
सरकार मामले को दबाने का कर रही प्रयास : भाजपा
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि चारा घोटाले में भी दबाने के आरोपों के बावजूद बाद में कई मामलों में सजा हुई थी और वर्तमान सरकार को इससे सबक लेना चाहिए।
प्रेस वार्ता में भाजपा के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी अजय राय भी मौजूद थे।






