राज्यसभा चुनाव में हार से बौखलाई कांग्रेस, भाजपा पर आरोप लगाने के बजाय करे आत्ममंथन: आदित्य साहू

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रांची, 20 जून। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने राज्यसभा चुनाव परिणाम को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि हार के कारणों की समीक्षा करने के बजाय कांग्रेस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझी हुई है।

शनिवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में साहू ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में मिली हार से कांग्रेस अब तक उबर नहीं पाई है। इसी हताशा में वह भाजपा पर आरोप लगाकर राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने दावा किया कि यह परिणाम कांग्रेस की राजनीतिक कमजोरियों को उजागर करता है और आने वाले समय में पार्टी को और भी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

कांग्रेस को करना चाहिए आत्ममंथन

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी कीमत पर सत्ता में बने रहने की राजनीति कांग्रेस की पुरानी कार्यशैली रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के बजाय कांग्रेस हमेशा सत्ता के लाभ को प्राथमिकता देती रही है।

साहू ने कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय यह विचार करना चाहिए कि उसके अपने विधायक और सहयोगी दल उससे दूरी क्यों बना रहे हैं। यदि पार्टी अपने विधायकों को एकजुट रखने में विफल रही है, तो इसके लिए भाजपा को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

लोकतांत्रिक मूल्यों पर कांग्रेस को घेरा

लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए साहू ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और परंपराओं को कमजोर करने का इतिहास भाजपा का नहीं, बल्कि कांग्रेस का रहा है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने हमेशा लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने का कार्य किया है।

‘सूटकेस राजनीति’ के आरोपों का जवाब

कांग्रेस द्वारा लगाए गए ‘सूटकेस राजनीति’ के आरोपों को खारिज करते हुए साहू ने कहा कि जनता अच्छी तरह जानती है कि धनबल की राजनीति किस दल की पहचान रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का राजनीतिक इतिहास सत्ता प्राप्ति के लिए धन और प्रभाव के इस्तेमाल से जुड़े विवादों से भरा रहा है।

परिमल नाथवानी को बाहरी बताना गलत

आदित्य साहू ने कांग्रेस द्वारा राजग समर्थित राज्यसभा प्रत्याशी परिमल नाथवानी को बाहरी बताए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि नाथवानी झारखंड से दो बार राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं और राज्य के विकास से जुड़े कई कार्यों में उनकी भूमिका रही है।

उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति को बाहरी बताना केवल राजनीतिक बयानबाजी है और इसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

भाजपा ने नहीं अपनाया जोड़-तोड़ का रास्ता

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी की पहली प्राथमिकता अपने किसी समर्पित कार्यकर्ता को राज्यसभा भेजने की थी, लेकिन पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के कारण परिस्थितियां अलग थीं।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा चाहती तो राजनीतिक जोड़-तोड़ का सहारा लेकर अपना उम्मीदवार जिता सकती थी, लेकिन पार्टी ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने बताया कि निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी समर्थन मांगने के लिए भाजपा के पास आए थे, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें समर्थन देने का फैसला किया।

अंतरात्मा और राज्यहित के आधार पर हुआ मतदान

साहू ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में सभी विधायक मतदाता होते हैं और परिमल नाथवानी ने विभिन्न दलों के विधायकों से समर्थन प्राप्त करने का प्रयास किया था। उन्होंने दावा किया कि विधायकों ने अपनी अंतरात्मा की आवाज, राज्यहित और राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए मतदान किया है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक विफलताओं के लिए दूसरों को दोष देने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए और यह समझना चाहिए कि उसके सहयोगी और विधायक उससे असंतुष्ट क्यों दिखाई दे रहे हैं।

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