गैस सिलेंडर संकट पर तमिलनाडु में घमासान, द्रमुक गठबंधन 15 मार्च को करेगा राज्यव्यापी प्रदर्शन

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चेन्नई। तमिलनाडु में रसोई गैस सिलेंडर की कथित कमी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन ने केंद्र सरकार के खिलाफ रविवार (15 मार्च) को पूरे राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। गठबंधन का आरोप है कि केंद्र सरकार की नीतियों और गलत विदेश नीति के कारण घरेलू तथा व्यावसायिक गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

गठबंधन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि गैस की कमी का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव होटल, रेस्तरां और छोटे-मझोले उद्योगों पर भी पड़ रहा है। यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो कई छोटे व्यवसायों के बंद होने का खतरा पैदा हो सकता है, जिससे हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।

गठबंधन ने यह भी बताया कि इस मुद्दे को लेकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर चुके हैं। हालांकि, गठबंधन का कहना है कि अब तक केंद्र की ओर से न तो लोगों में फैली चिंता को दूर करने के लिए कोई स्पष्ट कदम उठाया गया है और न ही संसद में इस विषय पर चर्चा कराने की पहल की गई है।

द्रमुक नेतृत्व वाले गठबंधन ने केंद्र सरकार पर तमिलनाडु के साथ भेदभाव करने का आरोप भी लगाया है। बयान में कहा गया है कि गैस की कमी के अलावा भी कई महत्वपूर्ण मामलों में केंद्र सरकार राज्य के प्रति उदासीन रवैया अपना रही है। इसमें शिक्षा से जुड़े फंड को रोकना, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत मिलने वाली राशि में देरी, पेयजल पाइपलाइन परियोजनाओं के लिए धन जारी न करना और मदुरै तथा कोयंबटूर मेट्रो रेल परियोजनाओं में अड़चनें पैदा करना जैसे मुद्दे शामिल हैं।

इसके अलावा गठबंधन ने होसुर हवाईअड्डा परियोजना में देरी और तीन-भाषा नीति के नाम पर तमिल भाषा की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया है। गठबंधन का कहना है कि इन सभी मुद्दों को लेकर केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के खिलाफ जनता का आक्रोश बढ़ रहा है।

घोषणा के अनुसार, रविवार 15 मार्च को सुबह 10:30 बजे तमिलनाडु के सभी जिलों में यूनियन, नगर, क्षेत्र और पंचायत स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। इन प्रदर्शनों में द्रमुक और सहयोगी दलों के सांसद, विधायक, जिला और यूनियन स्तर के पदाधिकारी, शाखा सचिव, स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम लोग शामिल होंगे।

गठबंधन ने अपने जिला सचिवों को निर्देश दिया है कि वे प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें, ताकि केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जनता का विरोध मजबूती से दर्ज कराया जा सके।

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