साइबर क्राइम पर बड़ी कार्रवाई, 150 करोड़ के घोटाले का मास्टरमाइंड सूरत एयरपोर्ट से पकड़ा गया

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सूरत। गुजरात के सूरत साइबर क्राइम सेल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे ट्रेडिंग फ्रॉड रैकेट के मुख्य आरोपित अल्पेश वघासिया को सूरत इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया।

आरोपित शेयर ट्रेडिंग और करेंसी ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी कर दुबई में बैठकर पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। ट्रेडिंग फ्रॉड रैकेट का मुख्य आरोपित अल्पेश वघासिया के बारे में एक चौंकाने वाली बात सामने आयी है कि अल्पेश सिर्फ 9वीं कक्षा तक पढ़ा है, लेकिन उसने करीब 1500 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन वाला साइबर नेटवर्क खड़ा कर दिया।

दुबई से भारत लौटते ही गिरफ्तारी

अल्पेश वघासिया लंबे समय से दुबई में रहकर अपने ठगी के नेटवर्क को चला रहा था। हालांकि वहां की बिगड़ती परिस्थितियों और युद्ध जैसी स्थिति के कारण वह दुबई छोड़कर भारत लौटना चाहता था। अंग्रेजी न आने के कारण उसे विदेश में रहने में भी परेशानी हो रही थी। जैसे ही वह भारत लौटने की कोशिश में सूरत एयरपोर्ट पहुंचा, पहले से जारी लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) के आधार पर साइबर क्राइम टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस को चकमा देने के लिए उसने तीन बार सूरत की फ्लाइट बुक की थी, लेकिन वे रद्द हो गईं। बाद में वह पहले बैंकॉक गया और वहां से अलग-अलग रूट से होते हुए सूरत पहुंचा, जहां उसे पकड़ लिया गया। आरोपित मूल रूप से राजकोट जिले के गोंडल का निवासी है और सूरत के वेलंजा इलाके में एक आलीशान बंगले में रहता था।

बैंक खातों में 1500 करोड़ से ज्यादा का लेन-देन

जांच में सामने आया कि इस गिरोह के विभिन्न बैंक खातों में करीब 15,36,30,08,975 रुपये के ट्रांजेक्शन हुए हैं। इतनी बड़ी रकम देखकर जांच अधिकारी भी हैरान रह गए। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह पैसा कहां से आया और किन-किन लोगों तक पहुंचा।

आरोपिताें ने सूरत के उत्राण और राजकोट में आलीशान ऑफिस खोल रखे थे। यहां आइवी ट्रेड और स्काई ग्रोथ वेल्थ मैनेजमेंट नाम से मल्टी लेवल मार्केटिंग ( एमएलएम) स्कीम चलाई जाती थी। बिना किसी वैध लाइसेंस के लोगों को करेंसी और शेयर ट्रेडिंग में ज्यादा मुनाफे का लालच दिया जाता था। निवेशकों का पैसा आंगड़िया और शेल कंपनियों के बैंक खातों के जरिए दुबई भेजा जाता था।

35 निवेशकों से 4.26 करोड़ की ठगी

अब तक की जांच में 35 निवेशक सामने आए हैं, जिनसे कुल 4 करोड़ 26 लाख 86 हजार 550 रुपये की ठगी की गई है। पुलिस को आशंका है कि पीड़ितों की संख्या और बढ़ सकती है। आरोपियों ने हांटेक मार्केट्स जैसी ऑनलाइन एप के जरिए लोगों को यह दिखाया कि उनका ट्रेडिंग चल रहा है, जबकि यह सिर्फ एक डिजिटल छलावा था।

पहले भी चार आरोपित हो चुके हैं गिरफ्तार

इस पूरे मामले में डीसीपी बिशाखा जैन ने बताया कि इस केस में सूरत साइबर क्राइम ने पहले ही डेनीश उर्फ हेमल धानक, जयसुख पटोलिया, यश पटोलिया और अजय उर्फ गोपाल भिंडी को गिरफ्तार कर लिया था। ये सभी साथी सूरत और राजकोट में ऑफिस संभालते थे और अल्पेश को सभी वित्तीय रिपोर्ट भेजते थे। इन चारों आरोपिताें की पूछताछ के दौरान ही पुलिस को अल्पेश वघासिया के दुबई कनेक्शन और निवेश से जुड़े मनी ट्रेल की जानकारी मिली थी।

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