रांची, 29 सितंबर । झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 30 सितंबर को झारखंड बंद का आह्वान किया है। बंद को सफल बनाने के लिए मंगलवार को शहीद चौक से अल्बर्ट एक्का चौक तक मशाल जुलूस निकाला गया। मोर्चा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार से लंबे समय से लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की।
24 जिलों और 200 प्रखंडों में मशाल जुलूस का दावा
मशाल जुलूस का नेतृत्व झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा एवं किसान सभा के संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने किया। उन्होंने कहा कि बंद के समर्थन में झारखंड के सभी 24 जिलों और करीब 200 प्रखंडों में मशाल जुलूस निकालकर लोगों से बंद को सफल बनाने का आह्वान किया गया है।
उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों की मांगों को लेकर संगठन लंबे समय से आंदोलन कर रहा है।
26 साल बाद भी मांगें लंबित होने का आरोप
पुष्कर महतो ने कहा कि झारखंड राज्य के गठन को 26 वर्ष हो चुके हैं। इसके बावजूद आंदोलनकारियों, किसानों और विस्थापितों से जुड़े कई मुद्दों पर सरकार के संकल्प और आश्वासनों के अनुरूप कार्रवाई नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि संगठन छात्र-छात्राओं के अधिकार, आंदोलनकारियों के सम्मान और स्वाभिमान, जल-जंगल-जमीन की रक्षा सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
जल-जंगल-जमीन की रक्षा की मांग
मोर्चा ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा को अपनी प्रमुख मांगों में शामिल किया है। इसके अलावा किसानों के विस्थापन और पलायन को रोकने तथा उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा की मांग की गई है।
संगठन का कहना है कि झारखंड की प्राकृतिक और खनिज संपदा से जुड़े अधिकारों पर भी राज्य के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
खनिज संपदा पर रॉयल्टी का अधिकार देने की मांग
आंदोलनकारियों ने झारखंड की 26 प्रतिशत खनिज संपदा पर रॉयल्टी के अधिकार की मांग भी उठाई है। मोर्चा का कहना है कि यह मांग लंबे समय से लंबित है और सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
आंदोलनकारियों के लिए सम्मान पेंशन और नौकरी की मांग
मोर्चा ने झारखंड आंदोलनकारियों को सम्मान पेंशन देने के साथ उनके अस्तित्व और नौकरी से जुड़ी सुविधाओं की मांग की है।
इसके अलावा किसानों की ऋण माफी तथा विस्थापितों को मुआवजा, नौकरी और पुनर्वास देने की मांग भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल है।
30 सितंबर के बंद से सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश
मोर्चा नेताओं ने कहा कि मशाल जुलूस और 30 सितंबर के झारखंड बंद के माध्यम से सरकार का ध्यान इन मांगों की ओर आकर्षित किया जा रहा है। संगठन चाहता है कि सरकार लंबित मुद्दों पर जल्द निर्णय ले, ताकि आंदोलनकारियों, किसानों और विस्थापितों को न्याय और सम्मान मिल सके।
15 नवंबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
मोर्चा ने सरकार को आगे के आंदोलन का संकेत भी दिया है। संगठन के अनुसार, यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो 15 नवंबर 2026 से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन और प्रदर्शन जैसे कार्यक्रम किए जा सकते हैं।
मोर्चा नेताओं ने कहा कि सरकार समय रहते मांगों पर विचार करे, ताकि ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।
मशाल जुलूस में कई नेता और कार्यकर्ता शामिल
मशाल जुलूस में पुष्कर महतो, पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता, मो. आसिफ, रेखा देवी, केडी सिंह, करमा तिग्गा, अजय कुमार, अमर भेंगरा, मनोज लकड़ा, सिमोन तिग्गा, श्यामल बनर्जी, करमा उरांव, समीर लकड़ा और सुरेंद्र कुमार महतो सहित बड़ी संख्या में आंदोलनकारी शामिल हुए।
मोर्चा ने लोगों से 30 सितंबर के झारखंड बंद को सफल बनाने में सहयोग की अपील की है।






