चाईबासा, 27 जुलाई। पश्चिमी सिंहभूम जिले स्थित 174वीं वाहिनी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में सोमवार को बल का 88वां स्थापना दिवस पूरे उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अधिकारियों, जवानों और उनके परिजनों ने भाग लिया।
आंतरिक सुरक्षा में सीआरपीएफ की भूमिका अहम
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए 174वीं वाहिनी के कमांडेंट मनोज डंग ने कहा कि सीआरपीएफ देश की आंतरिक सुरक्षा की सबसे महत्वपूर्ण ताकतों में से एक है। उन्होंने कहा कि बल ने आतंकवाद, उग्रवाद, नक्सलवाद, प्राकृतिक आपदाओं और अन्य चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हमेशा अपनी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है।
उन्होंने कहा कि देश की एकता, अखंडता और शांति बनाए रखने में सीआरपीएफ का योगदान गौरवपूर्ण रहा है। जवानों की वीरता, अनुशासन और समर्पण पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
एक बटालियन से बढ़कर 3.25 लाख जवानों का बल बना सीआरपीएफ
कमांडेंट मनोज डंग ने अधिकारियों, जवानों और उनके परिजनों को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए सीआरपीएफ के इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की स्थापना 27 जुलाई 1939 को मध्य प्रदेश के नीमच में क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस के रूप में हुई थी। स्वतंत्रता के बाद 28 दिसंबर 1949 को संसद के अधिनियम के तहत इसका नाम बदलकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल किया गया।
उन्होंने कहा कि एक बटालियन से शुरू हुआ यह बल आज 247 से अधिक बटालियनों और करीब 3.25 लाख जवानों के साथ देश का सबसे बड़ा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल बन चुका है।
आतंकवाद और नक्सल विरोधी अभियानों में निभाई अहम भूमिका
कमांडेंट ने कहा कि पंजाब में आतंकवाद विरोधी अभियानों, उत्तर-पूर्व में उग्रवाद नियंत्रण, जम्मू-कश्मीर में शांति व्यवस्था कायम रखने और झारखंड, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश तथा महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में नक्सल विरोधी अभियानों में सीआरपीएफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि संसद पर हमले जैसी राष्ट्रीय चुनौतियों और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी बल ने पूरी निष्ठा और साहस के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के तहत हैती, कोसोवो और लाइबेरिया जैसे देशों में सेवाएं देकर सीआरपीएफ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का गौरव बढ़ाया है।
शहीद स्मारक पर दी श्रद्धांजलि, जवानों ने लिया संकल्प
स्थापना दिवस के अवसर पर कमांडेंट मनोज डंग ने बटालियन मुख्यालय स्थित शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद क्वार्टर गार्ड पर सलामी लेकर गार्ड का निरीक्षण किया।
कार्यक्रम के दौरान विशेष सैनिक सम्मेलन, खेलकूद प्रतियोगिताओं और जवानों के लिए बड़े खाने का आयोजन भी किया गया।
अधिकारी और जवान रहे मौजूद
इस अवसर पर द्वितीय कमान अधिकारी जितेन्द्र कुमार, द्वितीय कमान अधिकारी रजनीश कुमार, उप कमांडेंट धर्मेन्द्र नारायण सिंह, उप कमांडेंट शांति किस्कू, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजयलक्ष्मी चौहान, चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप कुमार सी. सहित वाहिनी के अधिकारी, जवान और उनके परिजन उपस्थित रहे।






