नई दिल्ली, 23 सितंबर: सोशल मीडिया पर इन दिनों ‘लिम्फैटिक वॉकिंग’ (Lymphatic Walking) नाम का एक नया फिटनेस ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि खास तकनीक से की जाने वाली महज 10 मिनट की वॉक शरीर में जमा अतिरिक्त फ्लूइड को बाहर निकालने, पेट की ब्लोटिंग कम करने और सूजन से राहत दिलाने में मदद करती है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार लिम्फैटिक वॉकिंग से कुछ फायदे जरूर हो सकते हैं, लेकिन इसे सामान्य वॉक से कई गुना अधिक प्रभावी या तेजी से फैट बर्न करने वाली एक्सरसाइज बताने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।
क्या है लिम्फैटिक सिस्टम और कैसे करता है काम?
चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, मानव शरीर में रक्त संचार के अलावा एक महत्वपूर्ण तरल पदार्थ लिंफ (लसिका) भी प्रवाहित होता है। यह शरीर के ऊतकों से अतिरिक्त तरल पदार्थ और अन्य पदार्थों को लिंफैटिक सिस्टम के जरिए आगे ले जाने में भूमिका निभाता है।
रक्त संचार के लिए हृदय एक पंप की तरह काम करता है, लेकिन लिंफैटिक सिस्टम में ऐसा केंद्रीय पंप नहीं होता। लिंफ फ्लूइड के प्रवाह में शरीर की मांसपेशियों की गतिविधि और सांस लेने से होने वाली हलचल महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
यही वजह है कि लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने पर पैरों और टखनों में तरल पदार्थ जमा होने से भारीपन या हल्की सूजन महसूस हो सकती है। नियमित शारीरिक गतिविधि इस स्थिति में मददगार हो सकती है।
सामान्य वॉक में भी सक्रिय होता है लिंफ फ्लो
लिम्फैटिक वॉकिंग में कोई बिल्कुल अलग तरह की कसरत नहीं होती। इसमें आमतौर पर शरीर को सीधा रखने, हाथों को स्वाभाविक लय में आगे-पीछे चलाने और गहरी तथा नियमित सांस लेने पर ध्यान दिया जाता है।
हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार अभी ऐसे ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, जिनसे यह साबित हो कि केवल पॉश्चर या सांस लेने की तकनीक में मामूली बदलाव करने से सामान्य वॉक की तुलना में लिंफ का प्रवाह कई गुना बढ़ जाता है।
वास्तव में सामान्य वॉक के दौरान भी पैरों और पिंडलियों की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं। मांसपेशियों की यह गतिविधि और सांस लेने की प्रक्रिया लिंफ फ्लूइड के सामान्य प्रवाह में योगदान करती है।
वॉक के बाद हल्का महसूस होना फैट लॉस नहीं
लिम्फैटिक वॉकिंग के बाद अगर किसी व्यक्ति को शरीर हल्का महसूस होता है या ब्लोटिंग में कुछ कमी नजर आती है तो इसे सीधे वजन घटने या फैट लॉस से जोड़ना सही नहीं होगा।
ऐसा महसूस होना शरीर में मौजूद अतिरिक्त तरल पदार्थ के अस्थायी रूप से दोबारा वितरित होने या उसके प्रवाह में बदलाव से संबंधित हो सकता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि कुछ ही मिनट की वॉक से शरीर की चर्बी तेजी से कम हो गई।
वजन और शरीर की चर्बी कम करने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ संतुलित आहार और लंबे समय तक अपनाई जाने वाली स्वस्थ जीवनशैली अधिक महत्वपूर्ण है।
10 मिनट की वॉक भी हो सकती है फायदेमंद
जो लोग लंबे समय तक बैठे रहते हैं, उनके लिए कुछ मिनट की हल्की वॉक भी उपयोगी हो सकती है। अधिक नमक के सेवन, लंबे समय तक निष्क्रिय रहने या दिनभर बैठने की आदत के कारण होने वाले सामान्य फ्लूइड रिटेंशन में हल्की गतिविधि मदद कर सकती है।
इसके लिए किसी विशेष गैजेट या महंगे उपकरण की जरूरत नहीं है। आरामदायक गति से नियमित रूप से टहलना, बीच-बीच में लंबे समय तक बैठने से बचना और पर्याप्त शारीरिक गतिविधि बनाए रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
सोशल मीडिया के दावों से रहें सावधान
लिम्फैटिक वॉकिंग को लेकर सोशल मीडिया पर कई ऐसे दावे किए जा रहे हैं, जिनमें कुछ ही मिनटों में शरीर की चर्बी पिघलने, तेजी से वजन कम होने या शरीर से बड़ी मात्रा में विषैले पदार्थ निकलने की बात कही जाती है। ऐसे दावों को वैज्ञानिक तथ्य मानकर नहीं चलना चाहिए।
अगर किसी व्यक्ति को लगातार या बिना स्पष्ट कारण के पैरों, टखनों या शरीर के किसी हिस्से में सूजन रहती है, तो इसे केवल सामान्य फ्लूइड रिटेंशन मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
निष्कर्ष यही है कि लिम्फैटिक वॉकिंग को सामान्य वॉक का कोई जादुई विकल्प नहीं माना जा सकता। सही तरीके से की गई नियमित वॉक अपने आप में शरीर को सक्रिय रखने और स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बनने के लिए उपयोगी है।






