नई दिल्ली, 19 अगस्त। मोबाइल फोन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन, मिसाइल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अंतरिक्ष तकनीक तक आधुनिक अर्थव्यवस्था की बुनियाद जिस छोटे से चिप पर टिकी है, अब भारत उसी सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन देश में विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य सिर्फ सेमीकंडक्टर का बड़ा बाजार बनना नहीं, बल्कि चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, परीक्षण, सामग्री, उपकरण, कौशल और अंतिम इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तक पूरी श्रृंखला को भारत में विकसित करना है।
इसी महत्वाकांक्षा को वैश्विक मंच देने के लिए 17 से 19 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली के यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 का आयोजन किया जाएगा। इस बार सम्मेलन की थीम ‘सिलिकॉन से सिस्टम तक : इकोसिस्टम का निर्माण’ रखी गई है। सम्मेलन के जरिए भारत अपनी बढ़ती सेमीकंडक्टर क्षमता, निवेश के अवसरों और वैश्विक कंपनियों के साथ तकनीकी साझेदारी को दुनिया के सामने रखेगा।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बदल रही भारत की तस्वीर
भारत लंबे समय तक दुनिया के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स बाजारों में शामिल होने के बावजूद सेमीकंडक्टर चिप के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर रहा है। अब इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के जरिए इस निर्भरता को कम करने और देश को वैश्विक चिप वैल्यू चेन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की कोशिश हो रही है।
सरकार के अनुसार, सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के पहले चरण के तहत अब तक 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें से तीन परियोजनाओं में वाणिज्यिक उत्पादन भी शुरू हो चुका है। इसका मतलब है कि भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा अब केवल नीतियों और घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादन के स्तर तक पहुंच चुकी है।
इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन के मुताबिक इस वर्ष का सेमीकॉन इंडिया इसलिए खास है क्योंकि यह आयोजन सेमीकॉन कार्यक्रम की जमीनी सफलता की पृष्ठभूमि में हो रहा है। इसके साथ ही सेमीकॉन 2.0 के जरिए भारत ने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को और व्यापक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
1.27 लाख करोड़ रुपये के सेमीकॉन 2.0 से नई रफ्तार
केंद्र सरकार ने 15 जुलाई 2026 को 1,27,500 करोड़ रुपये के परिव्यय वाले सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण क्षमता को अगले स्तर पर ले जाना है।
इसके तहत भारतीय डिजाइन वाले चिप्स के विकास, सेमीकंडक्टर फैब के विस्तार, उन्नत पैकेजिंग और चिप निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, गैसों और उपकरणों के क्षेत्र को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।
यानी सरकार की रणनीति केवल चिप बनाने तक सीमित नहीं है। चिप के लिए जरूरी कच्चे माल और मशीनरी से लेकर डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग और अंतिम उत्पाद तक पूरी वैल्यू चेन को देश में विकसित करने की कोशिश है।
डिजाइन क्षेत्र में भारत की प्रतिभा सबसे बड़ी ताकत
सेमीकंडक्टर उद्योग में भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल तकनीकी और इंजीनियरिंग प्रतिभा आधार माना जाता है। इसी क्षमता को सेमीकंडक्टर डिजाइन की जरूरतों से जोड़ने के लिए सरकार शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स को अत्याधुनिक डिजाइन टूल उपलब्ध करा रही है।
सरकारी कार्यक्रमों के तहत 320 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों में ईडीए टूल्स की तैनाती और 68,000 से अधिक विद्यार्थियों के प्रशिक्षण जैसी पहलें की जा रही हैं। इसके अलावा 332 से अधिक संस्थानों और 105 स्टार्टअप्स को डिजाइन टूल्स तक पहुंच उपलब्ध कराने की दिशा में काम हुआ है, जबकि डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव के तहत 24 स्टार्टअप्स को मंजूरी दी गई है।
इसका उद्देश्य भारत को केवल विनिर्माण केंद्र नहीं बल्कि चिप डिजाइन और बौद्धिक संपदा के प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करना है।
200 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है भारत की चिप जरूरत
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत के सामने घरेलू मांग भी एक बड़ा अवसर है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के सीईओ एवं इलेक्ट्रॉनिकी एवं आईटी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अमितेश कुमार सिन्हा के अनुसार वैश्विक सेमीकंडक्टर आवश्यकता करीब एक ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर दो ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
इसी अवधि में भारत की सेमीकंडक्टर आवश्यकता भी करीब 100 अरब डॉलर से बढ़कर 200 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। इससे भारत के लिए एक साथ दो बड़े अवसर पैदा होते हैं—एक तरफ विशाल घरेलू बाजार और दूसरी तरफ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका।
सेमीकॉन इंडिया 2026 में दिखेगी वैश्विक भागीदारी
सेमीकॉन इंडिया 2026 का पैमाना भी भारत की बढ़ती महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। आयोजन में 500 से अधिक प्रदर्शक, 240 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय कंपनियां, 150 से अधिक अंतरराष्ट्रीय वक्ता और 40 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधिमंडल हिस्सा लेंगे।
15 हजार वर्गमीटर से अधिक के प्रदर्शनी क्षेत्र में छह देशों के पवेलियन, 10 राज्य सरकारों के पवेलियन, स्टार्टअप पवेलियन और इनोवेशन शोकेस होंगे। इसके साथ ही स्टार्टअप पिच प्रतियोगिता, छात्र हैकाथॉन और कार्यबल विकास पवेलियन भी आयोजित किए जाएंगे।
इससे स्पष्ट है कि भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में केवल बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को आकर्षित करने पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि घरेलू स्टार्टअप, विद्यार्थियों और कुशल कार्यबल को भी इस इकोसिस्टम का हिस्सा बनाना चाहता है।
वैश्विक दिग्गजों की मौजूदगी से बढ़ेगा भरोसा
सेमीकॉन इंडिया 2026 में सेमीकंडक्टर उद्योग की कई बड़ी वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इनमें एएसएमएल, एप्लाइड मैटेरियल्स, टेराडाइन, इनफिनॉन, एबारा, जाबिल, आईबीएम रिसर्च, एनएक्सपी, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, माइक्रोन, मर्क केजीएए, रैपिडस, लैम रिसर्च, सीजी पावर, एडवांटेस्ट, एसईएमआई, होरिबा एसईसी, स्क्रीन और टोक्यो इलेक्ट्रॉन जैसी कंपनियां शामिल हैं।
इन कंपनियों की भागीदारी भारत में निवेश, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के साथ एकीकरण की संभावनाओं को मजबूत करती है।
वैश्विक सप्लाई चेन में अहम भूमिका बनाने का लक्ष्य
एसईएमआई के अध्यक्ष एवं सीईओ अजीत मनोचा के मुताबिक भारत अपनी गति, महत्वाकांक्षा, प्रतिभा और दीर्घकालीन दृष्टिकोण के कारण सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आगे बढ़ने की मजबूत स्थिति में है।
भारत का लक्ष्य केवल वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में शामिल होना नहीं है, बल्कि उसका अभिन्न हिस्सा बनना है। इसके लिए डिजाइन से लेकर निर्माण, पैकेजिंग, सामग्री, उपकरण और सिस्टम निर्माण की सभी कड़ियों को आपस में जोड़ना जरूरी है।
‘रेत से सिलिकॉन से सिस्टम’ तक दिखेगी पूरी यात्रा
सेमीकॉन इंडिया 2026 में पहली बार ‘रेत से सिलिकॉन से सिस्टम तक’ पूरी मूल्य श्रृंखला का अनुभव भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह दिखाना है कि एक सामान्य कच्चे माल से शुरू होकर सेमीकंडक्टर चिप कैसे तैयार होती है और अंततः वह किस तरह मोबाइल, वाहन, रक्षा उपकरण, एआई सिस्टम या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का हिस्सा बनती है।
सेमीकॉन इंडिया और आईईएसए के अध्यक्ष अशोक चंदक के अनुसार, भारत की रणनीति वैश्विक कंपनियों और तकनीकी साझेदारों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण क्षमताओं को मजबूत करने की है। सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय देशों के साथ गोलमेज बैठकें भी होंगी, जिनका उद्देश्य निवेश, तकनीकी सहयोग और वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा देना है।
‘मेड इन इंडिया चिप’ से आगे की तैयारी
भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति अब केवल ‘मेड इन इंडिया चिप’ तक सीमित नहीं रह गई है। अगला लक्ष्य चिप से सिस्टम और सिस्टम से वैश्विक उत्पाद तक पहुंचने का है।
सेमीकॉन 1.0 के तहत मंजूर 12 परियोजनाएं, उनमें शुरू हो चुका वाणिज्यिक उत्पादन और सेमीकॉन 2.0 के लिए 1,27,500 करोड़ रुपये का प्रावधान इस दिशा में आधार तैयार कर रहा है।
यदि डिजाइन, फैब, पैकेजिंग, परीक्षण, सामग्री, उपकरण, कौशल और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम निर्माण की सभी कड़ियां एक-दूसरे से मजबूती से जुड़ती हैं, तो भारत आने वाले वर्षों में केवल सेमीकंडक्टर का बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं रहेगा। वह वैश्विक चिप उद्योग के उत्पादन, डिजाइन और नवाचार के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर सकता है।
यही ‘सिलिकॉन से सिस्टम तक’ की रणनीति भारत को दुनिया के अग्रणी सेमीकंडक्टर देशों की कतार में खड़ा करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम बन सकती है।






