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‘विकसित भारत–2047’ को लेकर रांची में मंथन: रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और नौसेना प्रमुख हुए शामिल

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रांची। झारखंड की राजधानी रांची स्थित सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) के संगम ऑडिटोरियम में शुक्रवार को ‘विकसित भारत–2047’ संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। संवाद कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत संबोधन से हुई। सीसीएल के निदेशक हर्ष नाथ मिश्रा ने रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ का आभार व्यक्त करते हुए इस संवाद कार्यक्रम की पहल के लिए उनकी सराहना की। उन्होंने नौसेना प्रमुख एडमिरल त्रिपाठी, अन्य अतिथियों, रक्षा बलों और विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए “जय हिंद, जय भारत” के उद्घोष के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।

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इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि आज का दिन विशेष रूप से पावन है, क्योंकि यह बसंत पंचमी, मां सरस्वती की आराधना और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती का अवसर है। उन्होंने युवाओं को ‘विकसित भारत–2047’ का ब्रांड एंबेसडर बताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि ऊर्जा और प्रेरणा का संगम है।

संजय सेठ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि एक लाख युवा संकल्प के साथ आगे बढ़ें, तो भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि देश की आधी से अधिक आबादी 30 वर्ष से कम आयु की है और यही युवा शक्ति भारत का भविष्य तय करेगी।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने कहा कि सभागार भले ही छोटा हो, लेकिन यहां उपस्थित युवाओं के दिल और सपने बहुत बड़े हैं। युवाओं का समर्पण और अनुशासन यह दर्शाता है कि भारत का भविष्य उज्ज्वल है। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत–2047’ अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि देश की नियति बन चुका है।

एडमिरल त्रिपाठी ने रिले रेस का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी अगली पीढ़ी को विकास की ‘बैटन’ सौंपने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को चार ट्रिलियन डॉलर से 30 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे देश अवश्य हासिल करेगा।

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उन्होंने समुद्री शक्ति और ब्लू इकोनॉमी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत का लगभग 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्ग से होता है, जबकि देश की 88 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकताएं भी समुद्र के रास्ते पूरी होती हैं। ऐसे में विकसित भारत की यात्रा एक “मैरीटाइम वॉयेज” होगी, जिसमें भारतीय नौसेना की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नौसेना प्रमुख ने कहा कि विकसित भारत केवल नीतियों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से बनेगा। उन्होंने युवाओं से कौशल विकास, समस्या समाधान क्षमता, डिजिटल साक्षरता, संचार कौशल और चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि “अंकों से डिग्री मिलती है, लेकिन स्किल्स से ग्रोथ मिलती है” और युवाओं को ‘नेवर गिव अप’ का संदेश देते हुए कवि सोहनलाल द्विवेदी की कविता के माध्यम से अपने वक्तव्य को विराम दिया।

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने नौसेना प्रमुख से ऑपरेशन सिंदूर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), स्वदेशी रक्षा प्रणाली, अनुशासन और प्रेरणा के स्रोतों से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका एडमिरल त्रिपाठी ने सरल और विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। संवाद कार्यक्रम ने युवाओं को राष्ट्रनिर्माण में अपनी भूमिका समझने और विकसित भारत के संकल्प को आत्मसात करने की प्रेरणा दी।

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