ममता बनर्जी पर भाजपा का हमला- मुख्यमंत्री चुनाव आयोग को खुले तौर पर धमका रही हैं

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे एक संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग को खुले तौर पर धमकाने का काम कर रही हैं जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

भाजपा मुख्यालय में बुधवार को आयोजित प्रेसवार्ता में पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर ममता बनर्जी डरी हुई हैं। वे आगामी चुनाव को लेकर हताश हो गई हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि तृणमूल कांग्रेस के कारण देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा हो रहा है।

प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया देश के 12 राज्यों में चल रही है लेकिन हंगामा केवल पश्चिम बंगाल से ही क्यों हो रहा है?

वर्ष 2005 में स्वयं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि पूरी मतदाता सूची बांग्लादेशियों से भरी हुई है। वही नेता अब दिल्ली में एसआईआर का विरोध कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसी राज्य की मुख्यमंत्री एक संवैधानिक संस्था का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति के खिलाफ अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल कर रही हैं। तृणमूल कांग्रेस के कारण देश की आंतरिक सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है। वर्ष 2016 से अब तक राज्य में 300 से अधिक भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि “पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। वे शांतिपूर्ण चुनावों में विश्वास नहीं करते। पश्चिम बंगाल में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (एससी–एसटी) समुदायों के सदस्यों की भी हत्याएं की जा रही हैं। पश्चिम बंगाल में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को लगातार धमकाया जा रहा है। संविधान की रक्षा की शपथ लेने वाली ममता बनर्जी खुले तौर पर चुनाव आयोग को धमका रही हैं।

आनंदपुर में आग लगने की एक घटना में 25 लोगों की मौत हो गई। वह वहां नहीं गईं, जबकि वह स्थान उनसे केवल 10 किलोमीटर दूर था लेकिन वह लगभग 1,000 किलोमीटर दूर दिल्ली आने के लिए तैयार हैं।”सुकांत मजूमदार ने कहा कि “ममता बनर्जी काली चादर पहनकर पहले सुप्रीम कोर्ट के बाहर और फिर चुनाव आयोग पहुंचीं।सुप्रीम कोर्ट जैसी गंभीर जगह पर ममता बनर्जी के मुंह से पहली बार “व्हाट्सअप कमीशन” जैसे शब्द इजाद होते देखे गए।जब मुख्यमंत्री ने 5 मिनट बोलने की गुहार लगाई तो उन्हें अनुमति दी गई लेकिन उनका भाषण पूरी तरह राजनीतिक था।इस पर सुप्रीम कोर्ट को कहना पड़ा कि आपका एडवोकेट अधिकृत है, हम उसी को सुनेंगे।“

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