Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

भारत के लिए और अधिक अंतरराष्ट्रीय मेडल जीतना मेरा लक्ष्य : शशिकला मौर्या

Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

Share

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के दीनापुर गांव की रहने वाली कराटे खिलाड़ी शशिकला मौर्या का कहना है कि उनका सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए और अधिक पदक जीतना है। वे आने वाले समय में विश्व चैंपियनशिप, एशियन चैंपियनशिप, एशियन गेम्स और ओलम्पिक जैसे बड़े मंचो पर शानदार प्रदर्शन कर भारत का नाम दुनिया भर में रोशन करना चाहती हैं।

कराटे खिलाड़ी शशिकला मौर्या आज अपने संघर्ष, मेहनत और उपलब्धियों के कारण युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीतकर अपनी अलग पहचान बनाई है। शशिकला ने विशेष बातचीत में कहा कि वह एक आम लड़की हैं, जो अपने माता-पिता से मिले नाम को बनाने में लगी है। उनके पिता ओमप्रकाश मौर्या फूल-माला बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। इसी सीमित आय में से वह अपनी बेटी के कराटे प्रशिक्षण और खर्च का भी प्रबंध करते रहे हैं।

- Sponsored -
Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

शशिकला बताती हैं कि उनका खेल सफर बेहद साधारण तरीके से शुरू हुआ। जब वो कंपोजिट विद्यालय में पढ़ती थीं, तब वहां एक शिक्षक कराटे की कोचिंग देने आते थे। उसी दौरान एक लड़की कराटे सीखने जाती थी, तो मैं भी उसके साथ वहां चली गई। वहीं मेरी मुलाकात कोच अरविंद मौर्य से हुई, जिन्होंने उन्हें प्रशिक्षित किया और प्रतियोगिताओं में खेलने के लिए प्रेरित किया। मुझे यह खेल इतना पसंद आया कि मैंने इसे अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया।

उन्होंने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है। कई बार टूर्नामेंट की फीस, किट और यात्रा का खर्च जुटाना भी मुश्किल हो जाता था। उनकी दिनचर्या भी काफी कठिन रही है। वह सुबह फूल तोड़ने जाती हैं, फिर माला बनाती और उसके बाद अभ्यास के लिए अकादमी पहुंचती हैं। अकादमी तक पहुंचने के लिए उन्हें रोजाना लगभग 20 से 30 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। इसके बावजूद उनका ध्यान हमेशा अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहा।

- Sponsored -
Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

शशिकला अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने पिता और कोच को देती हैं। उनका कहना है कि जब समाज के लोग यह कहते थे कि लड़की होकर मार्शल आर्ट्स क्यों सीख रही है, तब पिता हमेशा उनके साथ खड़े रहे। उनका विश्वास ही सबसे बड़ी ताकत बना। साथ ही उनके कोच अरविंद मौर्या ने उन्हें प्रशिक्षण देने के साथ-साथ कई बार आर्थिक रूप से भी मदद की।

राष्ट्रीय स्तर पर शशिकला ने वर्ष 2018 से पदक जीतने का सिलसिला शुरू किया। उन्होंने 2018 की सब-जूनियर नेशनल कराटे चैंपियनशिप (नई दिल्ली) में कुमिते में रजत पदक जीता। 2019 में सब-जूनियर नेशनल कराटे चैंपियनशिप में कुमिते में कांस्य पदक और देहरादून में आयोजित नॉर्थ इंडिया जोनल कराटे चैंपियनशिप में कुमिते में रजत तथा काता में कांस्य पदक प्राप्त किया।

- Sponsored -
Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

वर्ष 2023 में देहरादून में आयोजित कैडेट और जूनियर नेशनल कराटे चैंपियनशिप में उन्होंने कुमिते और काता दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा 2023-24 में 67वें नेशनल स्कूल गेम्स लुधियाना में कुमिते में स्वर्ण पदक जीता। 2024 में देहरादून में आयोजित नेशनल कराटे चैंपियनशिप में जूनियर काता में रजत पदक हासिल किया। वहीं 2025 में मेरठ में आयोजित ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी किकबॉक्सिंग चैंपियनशिप में रजत पदक और 2026 में नेशनल कराटे चैंपियनशिप में काता में रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शशिकला ने भारत का प्रतिनिधित्व किया है। वर्ष 2023 में कजाकिस्तान के अल्माटी में आयोजित 21वीं एशियन कैडेट, जूनियर और अंडर-21 कराटे चैंपियनशिप में उन्होंने जूनियर काता स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा नेपाल के काठमांडू में आयोजित 7वीं साउथ एशियन कराटे चैंपियनशिप में कुमिते में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। वह इसे अपने जीवन का सबसे यादगार अनुभव मानती हैं।

भविष्य को लेकर शशिकला का सपना है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए और अधिक पदक जीतें और बड़े मंचों पर देश का नाम रोशन करें।

Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

Share this article

Facebook
Twitter X
WhatsApp
Telegram
 
April 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930