भागलपुर, 02 अक्टूबर। संतान की दीर्घायु, आरोग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की मंगलकामना को लेकर माताओं का कठिन अनुष्ठान जिउतिया (जीवित्पुत्रिका) पर्व शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ श्रद्धापूर्वक शुरू हो गया। पर्व के शुभारंभ के साथ ही भागलपुर और सुल्तानगंज के विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा इलाका भक्तिमय हो उठा।
शुक्रवार तड़के से ही शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में व्रती महिलाएं गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के लिए घाटों पर पहुंचने लगीं। सुल्तानगंज के प्रसिद्ध उत्तरवाहिनी गंगा घाट के अलावा भागलपुर शहर के बरारी घाट, सीढ़ी घाट, पुल घाट, एसएम कॉलेज घाट और खंजरपुर घाट पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई।
गंगा घाटों पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब
सुबह होते-होते गंगा के विभिन्न घाटों पर व्रती महिलाओं की लंबी कतारें लग गईं। दूर-दराज के गांवों से पहुंचीं महिलाओं ने पवित्र गंगा में स्नान किया और सूर्य देव को अर्घ्य देकर संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना की।
गंगा स्नान के बाद महिलाओं ने घाट पर ही विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद घर लौटकर उन्होंने नहाय-खाय की परंपरा पूरी की और तीन दिवसीय जिउतिया अनुष्ठान के कठिन व्रत का संकल्प लिया।
मड़ुआ की रोटी और नोनी का साग बना विशेष प्रसाद
जिउतिया पर्व के नहाय-खाय के दिन व्रती महिलाओं ने विशेष शुद्धता और सात्विकता के साथ प्रसाद तैयार किया। परंपरा के अनुसार इस दिन मड़ुआ की रोटी, नोनी का साग, कंदा की सब्जी और झीनी (तोरई) का विशेष रूप से सेवन किया गया।
व्रतियों ने विधि-विधान के साथ प्रसाद ग्रहण किया। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी इसे श्रद्धापूर्वक प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। नहाय-खाय के बाद ही जिउतिया के कठिन उपवास की शुरुआत मानी जाती है।
शनिवार को रखा जाएगा निर्जला व्रत
जिउतिया को हिंदू धर्म के कठिन व्रतों में माना जाता है। नहाय-खाय के बाद शनिवार को व्रती महिलाएं निर्जला उपवास रखेंगी। इस दौरान वे अन्न के साथ-साथ पानी का भी सेवन नहीं करेंगी।
व्रती महिलाएं पूरे दिन भगवान जीमूतवाहन का स्मरण करेंगी और संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य तथा परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करेंगी।
जीमूतवाहन की पूजा और सुनी जाएगी व्रत कथा
शनिवार शाम को जिउतिया व्रत के तहत भगवान जीमूतवाहन की पूजा विधि-विधान से की जाएगी। परंपरा के अनुसार कुशा से जीमूतवाहन की प्रतिमा तैयार कर उनकी पूजा-अर्चना की जाएगी।
इसके बाद व्रती महिलाएं सामूहिक रूप से जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनेंगी। इस दौरान महिलाएं एक-दूसरे को जिउतिया पर्व की कथा सुनाकर व्रत की परंपराओं का पालन करेंगी।
रविवार को पारण के साथ होगा समापन
तीन दिवसीय जिउतिया अनुष्ठान का समापन रविवार को सूर्योदय के बाद पारण के साथ होगा। निर्जला व्रत रखने वाली महिलाएं पूजा-अर्चना के बाद पारण कर व्रत पूरा करेंगी।
इस दौरान परिवार के सदस्य भी व्रती महिलाओं की सेवा और पूजा की तैयारियों में सहयोग करेंगे।
घाटों पर प्रशासन ने किए सुरक्षा के इंतजाम
जिउतिया पर्व को लेकर गंगा घाटों पर उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए भागलपुर जिला प्रशासन और स्थानीय नगर निकायों की ओर से सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं।
विभिन्न घाटों पर बैरिकेडिंग की गई है और श्रद्धालुओं को गहरे पानी में नहीं जाने की चेतावनी दी गई है। भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।
गोताखोर और मेडिकल टीमें भी तैनात
गंगा घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था के तहत गोताखोरों और चिकित्सा टीमों को भी मुस्तैद रखा गया है। प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने और निर्धारित सुरक्षित स्थानों पर ही स्नान करने की अपील की गई है।
जिउतिया पर्व के पहले दिन बड़ी संख्या में महिलाओं के गंगा स्नान के लिए पहुंचने से भागलपुर के विभिन्न घाटों पर दिनभर आस्था और भक्ति का माहौल बना रहा। संतान की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना के साथ महिलाओं ने कठिन व्रत का संकल्प लिया।






