बांग्लादेश में 11 दिन के अंतराल में डॉक्टर बेटे और पिता की मौत, घटनाओं से अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय में चिंता

Share

ढाका, 21 सितंबर । बांग्लादेश में महज 11 दिनों के अंतराल में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से जुड़े एक युवा चिकित्सक और उनके पिता की असामान्य परिस्थितियों में मौत के बाद स्थानीय स्तर पर चिंता का माहौल है। सात सितंबर को सिलहट में 31 वर्षीय चिकित्सक पद्मजीत चक्रवर्ती का शव किराये के मकान से बरामद हुआ था। इसके 11 दिन बाद मौलवीबाजार में उनके पिता पूर्णेंदु चक्रवर्ती का शव उनके पारिवारिक व्यावसायिक प्रतिष्ठान के ऊपरी कमरे से मिला।

हालांकि, दोनों मौतों के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुलिस की ओर से अभी पुष्टि नहीं की गई है। दोनों मामलों की जांच अलग-अलग स्तर पर जारी है।

फार्मेसी की दूसरी मंजिल पर मिला पिता का शव

पूर्णेंदु चक्रवर्ती का शव मौलवीबाजार शहर के एम. सैफुर रहमान रोड स्थित ‘भटेर फार्मेसी’ की दूसरी मंजिल के एक कमरे से बरामद किया गया।

मौलवीबाजार मॉडल थाने के उपनिरीक्षक मनोज कुमार सरकार के अनुसार, मौत के सटीक कारण की अभी पुष्टि नहीं हुई है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।

सात सितंबर को डॉक्टर बेटे की हुई थी मौत

इससे पहले सात सितंबर को सिलहट शहर के मिर्जाजंगल इलाके में स्थित किराये के मकान से पद्मजीत चक्रवर्ती का शव बरामद किया गया था। वह ब्राह्मणबाड़िया मेडिकल कॉलेज में चिकित्सक थे और उनकी उम्र 31 वर्ष थी।

बताया गया है कि करीब दो वर्ष पहले उनका विवाह हुआ था। नए मकान में रहने के लिए जाने के अगले ही दिन उनकी असामान्य मौत हो गई। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के आधार पर आत्महत्या की आशंका जताई थी। हालांकि, मामले की जांच जारी है।

11 दिन के अंतराल ने खड़े किए सवाल

पिता और पुत्र की मौत के बीच महज 11 दिनों का अंतर होने के कारण स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक साक्ष्य सामने नहीं आया है, जिससे दोनों घटनाओं के बीच प्रत्यक्ष संबंध स्थापित हो सके।

पद्मजीत की मौत को लेकर पुलिस की प्रारंभिक आशंका आत्महत्या की है, जबकि पूर्णेंदु की मौत का कारण पोस्टमार्टम और जांच के बाद स्पष्ट होने की बात कही गई है।

हिंदू संगठन ने निष्पक्ष जांच की मांग की

बांग्लादेश राष्ट्रीय हिंदू महासंघ के महासचिव पलाश कांति दे ने दोनों मौतों को लेकर चिंता जताते हुए निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि आत्महत्या और हत्या की आशंका के बीच वास्तविक कारण सामने लाने के लिए पारदर्शी जांच जरूरी है।

उन्होंने दावा किया कि देश में अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े चिकित्सक, शिक्षक, पुलिसकर्मी और पत्रकार भी सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं। उन्होंने हिंदू समुदाय के खिलाफ कथित धमकी, उत्पीड़न और हिंसा की घटनाओं का भी उल्लेख किया।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर उठाए सवाल

पलाश कांति दे ने ढाका विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर अबुल बरकत की ‘राजनीतिक अर्थव्यवस्था’ पुस्तक में दिए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए अल्पसंख्यक समुदाय की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि हिंदू समुदाय के खिलाफ होने वाली कई घटनाएं सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ पाती हैं और भय के कारण पीड़ित परिवार शिकायत या घटनाओं को सार्वजनिक करने से बचते हैं।

उन्होंने हिंदू परिवारों को धमकाने, घरों में आग लगाने और देश छोड़ने के लिए दबाव बनाए जाने जैसे आरोप भी लगाए। हालांकि, ये दावे उनके व्यक्तिगत या संगठनात्मक आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।

दोनों मौतों के कारणों का इंतजार

फिलहाल पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। पद्मजीत चक्रवर्ती की मौत को लेकर पुलिस की प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की आशंका जताई गई है, जबकि उनके पिता पूर्णेंदु चक्रवर्ती की मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं है।

ऐसे में जांच पूरी होने से पहले दोनों घटनाओं को आपस में जोड़ना या मौतों की वजह को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

Share this article

Facebook
Twitter X
WhatsApp
Telegram
 
November 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
30