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पेरिस में वीमर फॉर्मेट की पहली बैठक में शामिल हुए जयशंकर, भारत-यूरोप के बढ़ते रिश्तों को किया रेखांकित 

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पेरिस (फ्रांस)। फ्रांस के दौरे पर पहुंचे भारत के विदेशमंत्री डॉ. एस जयशंकर ने पहली बार अपने वीमर (जर्मनी, फ्रांस, पोलैंड) के समकक्षों के साथ वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। डॉ. जयशंकर ने इस दौरान अपने समकक्षों से भारत-यूरोपियन यूनियन संबंधों को मजबूत करने के अलावा इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) की चुनौतियों पर चर्चा की।

डॉ. जयशंकर ने एक्स पोस्ट पर फोटो के साथ यह जानकारी दी। उन्होंने कहा इस दौरान यूक्रेन संघर्ष पर विचारों को साझा किया गया। भारत ने खुली और स्पष्ट चर्चा में इन मुद्दों पर अपने विचार रखे। बैठक के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन दुनिया को वीमर और भारत के रुख से अवगत कराया गया।

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भारतीय विदेशमंत्री डॉ. जयशंकर ने इससे पहले फ्रांस के विदेशमंत्री जीन नोएल बैरट से मिलने के बाद कहा कि यूरोप वैश्विक स्तर पर अहम खिलाड़ी है और जरूरी है कि भारत और यूरोप के रिश्ते मजबूत हों। भारत और फ्रांस वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में स्थिरता ला सकते हैं। जयशंकर ने बताया कि भारत अगले कुछ हफ्तों में, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं की मेजबानी करेगा।

उल्लेखनीय है कि इंडो-पैसिफिक उभरता हुआ भू-राजनीतिक और आर्थिक केंद्र है। इसमें हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के आसपास के देश और जलक्षेत्र शामिल हैं। यह पूर्वी अफ्रीका तट से पश्चिमी प्रशांत महासागर तक फैला है और विश्व की अधिकांश आबादी और अर्थव्यवस्था का केंद्र है। इसमें भारत, चीन, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह क्षेत्र व्यापार, सुरक्षा और समुद्री मार्गों के लिए महत्वपूर्ण है।

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यह वैश्विक शक्ति संतुलन और समुद्री सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत इसे ‘मुक्त, खुला और समावेशी’ क्षेत्र मानता है। आईपीओआई (इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव) भारतीय पहल है। इसका लक्ष्य समुद्री सुरक्षा और सहयोग को मजबूत करना है। अमेरिका की भी इस पर दिलचस्पी है। उसने आईपीईएफ (इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क) की पहल की है। एक तरह से यह आर्थिक सहयोग ढांचा है। इसमें 14 देश शामिल हैं।

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