नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार मंगलवार शाम 5 बजे थम गया। अब दोनों राज्यों में 23 अप्रैल को मतदान होगा।
साइलेंस पीरियड लागू
चुनाव आयोग के अनुसार, प्रचार थमने के साथ ही ‘साइलेंस पीरियड’ लागू हो गया है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के तहत मतदान से 48 घंटे पहले किसी भी तरह के प्रचार पर रोक रहती है, ताकि मतदाता स्वतंत्र रूप से फैसला ले सकें।
तमिलनाडु में मुकाबला
तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर एक ही चरण में 23 अप्रैल को वोटिंग होगी। यहां कुल 4,023 उम्मीदवार मैदान में हैं। मुख्य मुकाबला द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के बीच माना जा रहा है, जबकि विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम भी कई सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना रही है।
पश्चिम बंगाल में पहला चरण
पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान होगा। इस चरण में 1,478 उम्मीदवार मैदान में हैं और करीब 3.60 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
प्रमुख आंकड़े
मतदाताओं में लगभग 1.84 करोड़ पुरुष, 1.75 करोड़ महिला और 465 ट्रांसजेंडर शामिल हैं। चुनाव आयोग द्वारा मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
प्रमुख चेहरा
राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से चुनाव मैदान में हैं, जहां उनकी सीधी टक्कर भारतीय जनता पार्टी से है।
आगे का कार्यक्रम
पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर दो चरणों में मतदान होगा—पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा चरण 29 अप्रैल को। वहीं तमिलनाडु की सभी सीटों पर एक ही चरण में मतदान होगा। दोनों राज्यों के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।






