सुरक्षा पर सियासत तेज: लालू राबड़ी के बाद अब तेजस्वी यादव ने भी लौटाई अपनी  Y+ सुरक्षा

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पटना, 06 जून: बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने ‘सिक्योरिटी बॉयकॉट’ की नई रणनीति अपनाते हुए सियासी हलचल तेज कर दी है। लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के बाद अब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अपनी ‘Y+’ कैटेगरी की सुरक्षा वापस कर दी है।

प्रवक्ता ने की पुष्टि

राजद के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि सुरक्षा में कटौती के विरोध में यह सामूहिक निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि तेजस्वी यादव ने भी अपनी सुरक्षा वापस कर दी है।

राबड़ी देवी के फैसले से शुरुआत

शनिवार सुबह राबड़ी देवी ने अपने आवास से सुरक्षाकर्मियों को वापस कर दिया था। राजद का आरोप है कि सरकार ने उनकी ‘Z+’ सुरक्षा में कटौती कर उन्हें अपमानित किया, जिसके विरोध में उन्होंने यह कदम उठाया।

दिल्ली में तेजस्वी, पटना लौटी सुरक्षा टीम

सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी यादव फिलहाल दिल्ली में हैं, जबकि उनकी ‘Y+’ सुरक्षा टीम पटना लौट आई है। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि राजद इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से बड़ा बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

RJD का आरोप—सरकार ने किया अपमान

राजद का कहना है कि राज्य सरकार ने उनके नेताओं की सुरक्षा में कटौती कर उन्हें अपमानित किया है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि जिन कार्यकर्ताओं को भी सरकारी सुरक्षा मिली है, वे भी उसे वापस कर सकते हैं।
पार्टी का दावा है कि राज्य की बड़ी आबादी उनके साथ खड़ी है।

जदयू का पलटवार

वहीं, जदयू ने इस पूरे घटनाक्रम को ‘राजनीतिक नाटक’ बताया है। पार्टी प्रवक्ता नीरज कुमार ने तंज कसते हुए कहा कि अगर सुरक्षा वापस की जा रही है तो सरकारी आवास और अन्य सुविधाएं भी लौटाई जानी चाहिए।

रोहिणी आचार्य का हमला

लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने भी सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि सुरक्षा में कटौती के बाद दिखावटी सुरक्षा रखने का कोई मतलब नहीं है और यह फैसला परिवार को नुकसान पहुंचाने की नीयत से लिया गया है।

सियासी तापमान बढ़ा

इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक तरफ राजद इसे सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे केवल राजनीतिक स्टंट करार दे रहा है।

आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है और राज्य की सियासत में बड़ा असर डाल सकता है।

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