भोपाल। मध्य प्रदेश के नीमच जिले में जिला प्रशासन की अभिनव पहल ‘पंख अभियान’ ने बांछड़ा समुदाय की बेटियों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। जो बेटियां कभी सामाजिक कुरीतियों और मजबूरियों में घिरी थीं, आज वे आत्मनिर्भर और सशक्त बनकर नई पहचान बना रही हैं।
कुरीति से सम्मान तक का सफर
बांछड़ा समुदाय लंबे समय से आर्थिक अभाव और सामाजिक कुरीतियों के कारण हाशिए पर रहा है। खासकर बेटियों को देह-व्यापार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। ‘पंख अभियान’ ने इन्हें इस दायरे से निकालकर शिक्षा और सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर किया है।
वर्दी पहनने का सपना
अभियान के तहत ‘सशक्त वाहिनी’ योजना चलाई जा रही है, जिसमें 14 बेटियां पुलिस और अर्धसैनिक बलों में भर्ती की तैयारी कर रही हैं। प्रशासन उन्हें निःशुल्क शिक्षा और शारीरिक प्रशिक्षण देकर देश सेवा के लिए तैयार कर रहा है।
हुनर से आत्मनिर्भरता
आर्थिक सशक्तिकरण के लिए 30 महिलाओं और बालिकाओं को स्वरोजगार प्रशिक्षण से जोड़ा गया है। इसमें पशुपालन, सिलाई, ब्यूटी पार्लर, मसाला प्रसंस्करण जैसे कार्य सिखाए जा रहे हैं, जिससे वे खुद की कमाई कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
जमीनी स्तर पर बदलाव
अभियान के तहत 26 आंगनबाड़ी केंद्रों में सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं। साथ ही 48 स्वास्थ्य शिविर और 25 जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं तक स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाएं पहुंचाई गई हैं।
सामूहिक प्रयास से सफलता
यह अभियान विभिन्न विभागों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से सफल हुआ है। ‘पंख अभियान’ ने साबित किया है कि सही दिशा और संवेदनशील प्रयासों से किसी भी समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।






