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नीतीश मॉडल का असर: 50% महिला आरक्षण से बदली बिहार की राजनीति, बना राष्ट्रीय उदाहरण

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पटना : बिहार में महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा बदलाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में शुरू हुए 50% आरक्षण मॉडल से देखने को मिला। वर्ष 2006 में पंचायत और नगर निकाय चुनावों में महिलाओं के लिए आधी सीटें आरक्षित किए जाने के फैसले ने जमीनी लोकतंत्र की तस्वीर ही बदल दी।

पहले जहां स्थानीय निकायों में पुरुषों का वर्चस्व था, वहीं अब महिलाएं मुखिया, सरपंच और पार्षद जैसे पदों पर सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इससे न सिर्फ उनकी राजनीतिक भागीदारी बढ़ी, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी उनकी स्थिति मजबूत हुई है। अब महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और विकास जैसे मुद्दों को प्राथमिकता से उठा रही हैं, जिससे प्रशासनिक फैसलों में संवेदनशीलता और पारदर्शिता बढ़ी है।

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सरकार ने महिलाओं को रोजगार के क्षेत्र में भी आगे बढ़ाने का काम किया। वर्ष 2016 में सरकारी नौकरियों में 35% आरक्षण लागू किया गया, जिसे बाद में बढ़ाकर 50% कर दिया गया। इसका असर यह हुआ कि बड़ी संख्या में महिलाएं शिक्षण, स्वास्थ्य और अन्य सरकारी सेवाओं में शामिल हुईं।

इसके साथ ही जीविका योजना ने आर्थिक सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभाई। स्वयं सहायता समूहों के जरिए लाखों महिलाओं को जोड़कर उन्हें बचत, ऋण और छोटे व्यवसायों से आत्मनिर्भर बनाया गया। आज करोड़ों महिलाएं इस योजना से जुड़कर अपनी आय बढ़ा रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।

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बिहार का यह मॉडल अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुका है। कई राज्य इसे अपनाने पर विचार कर रहे हैं। महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में यह पहल एक मजबूत उदाहरण बनकर उभरी है, जिसने समाज में नई सोच और बदलाव की नींव रखी है।

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