जेपीएससी इंटरव्यू में गड़बड़ी के आरोपों पर बाबूलाल मरांडी का सवाल, जब जांच से जुड़े अधिकारी ही बोर्ड में थे तो सीआईडी जांच कैसे निष्पक्ष

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रांची, 19 अगस्त । झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की कई नियुक्ति परीक्षाएं रद्द किए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार की ओर से कराई जा रही सीआईडी जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग दोहराई है।

मरांडी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए विशेष रूप से जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं और इंटरव्यू प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि जांच में सामने आए बयानों के आधार पर इंटरव्यू बोर्ड को कथित रूप से प्रभावित किए जाने की बात सामने आई है। उनका कहना है कि यदि इंटरव्यू प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो इंटरव्यू बोर्ड में शामिल सभी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

इंटरव्यू बोर्ड को ‘सेट’ करने के आरोप पर सवाल

बाबूलाल मरांडी के अनुसार, टीडीपीएल एजेंसी से जुड़े रामवीर सिंह और अभय तिवारी ने 11वीं-13वीं जेपीएससी परीक्षा को लेकर अपने बयानों में इंटरव्यू बोर्ड को कथित तौर पर ‘सेट’ करने की बात कही है।

उन्होंने दावा किया कि रामवीर सिंह ने कथित रूप से कहा है कि कोड डिकोड कर कुछ अभ्यर्थियों को तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष और सदस्यों के इंटरव्यू बोर्ड में बुलाया जाता था। मरांडी ने सवाल उठाया कि यदि जांच में ऐसे आरोप सामने आए हैं तो इंटरव्यू बोर्ड की पूरी प्रक्रिया और उसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका की गहनता से जांच क्यों नहीं की जा रही है।

उन्होंने कहा कि केवल परीक्षा रद्द करने से मामला खत्म नहीं होता। कथित अनियमितता के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी जरूरी है।

सीआईडी की भूमिका पर उठाए सवाल

भाजपा नेता ने जांच एजेंसी की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि इंटरव्यू बोर्ड में सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक समेत कई आईपीएस अधिकारी शामिल रहे हैं।

मरांडी ने सवाल किया कि यदि जांच एजेंसी से जुड़े अधिकारी ही कथित रूप से उस प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैं जिसकी अब जांच की जा रही है, तो उसी एजेंसी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कैसे सुनिश्चित की जा सकती है।

उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की कि जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच सीबीआई को सौंपी जाए, ताकि जांच की विश्वसनीयता को लेकर किसी तरह का सवाल न रहे।

‘सभी अधिकारियों के बयान दर्ज हों’

मरांडी ने कहा कि यदि साक्षात्कार प्रक्रिया को प्रभावित या मैनेज किए जाने के आरोप सामने आए हैं तो इंटरव्यू बोर्ड में शामिल रहे सभी अधिकारियों के बयान दर्ज किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच को केवल परीक्षा रद्द करने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि पूरे घटनाक्रम की तह तक जाकर कथित गड़बड़ी में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका तय की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से जारी अधिसूचनाओं में सीआईडी जांच के आधार पर परीक्षाओं में अनियमितता पाए जाने का उल्लेख किया गया है। इसी मामले में जेपीएससी अध्यक्ष की गिरफ्तारी का भी जिक्र करते हुए उन्होंने जांच की दिशा और दायरे पर सवाल उठाए।

जेएसएससी के प्रभारी अध्यक्ष पर भी सवाल

भाजपा नेता ने जेएसएससी के प्रभारी अध्यक्ष प्रशांत कुमार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जब परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर इतनी बड़ी कार्रवाई की गई है और कई परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं, तो जेएसएससी के प्रभारी अध्यक्ष के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

मरांडी ने कहा कि सरकार को इस सवाल का स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उनके मुताबिक, परीक्षा रद्द करने से उन अभ्यर्थियों और चयनित उम्मीदवारों की समस्याएं तो पैदा हुई हैं, लेकिन कथित गड़बड़ी के वास्तविक जिम्मेदार लोगों तक पहुंचना भी उतना ही जरूरी है।

‘परीक्षा रद्द करना पर्याप्त नहीं’

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं को रद्द करना समाधान का अंतिम कदम नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े इस मामले में जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय होनी चाहिए।

उन्होंने मुख्यमंत्री से एक बार फिर सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि इससे कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो सकेगी और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि जांच के दायरे में परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सभी अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों को शामिल किया जाना चाहिए।

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