छपरा जंक्शन पर मानव तस्करी रैकेट का भंडाफोड़, बचपन बचाओ आंदोलन के तहत तीन आरोपी गिरफ्तार, 8 नाबालिगों का रेस्क्यू

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सारण। रेल सुरक्षा बल और सीआईबी की टीम ने छपरा जंक्शन पर मानव तस्करी के एक रैकेट का भंडाफोड़ किया है। बचपन बचाओ आंदोलन के तहत चलाई जा रही विशेष ड्राइव के दौरान गाड़ी संख्या 12407 न्यू जलपाईगुड़ी-अमृतसर कर्मभूमि एक्सप्रेस से आठ नाबालिग बच्चों को बचाया गया। इन बच्चों को बंधुआ मजदूरी के लिए पंजाब ले जाया जा रहा था। इस मामले में पुलिस ने तीन शातिर तस्करों को भी पकड़ा है।

मंडल सुरक्षा आयुक्त और सहायक सुरक्षा आयुक्त छपरा के नेतृत्व में आरपीएफ की टीम को मुखबिर से प्राप्त गुप्त सूचना मिली थी कि कटिहार और पूर्णिया क्षेत्र से कुछ बच्चों को अवैध रूप से पंजाब ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही निरीक्षक छपरा पोस्ट और निरीक्षक सीआईबी छपरा ने एक विशेष टीम का गठन किया। जैसे ही कर्मभूमि एक्सप्रेस छपरा जंक्शन पर पहुंची उप निरीक्षक विशाल कांस्टेबल वकील प्रसाद, एएसआई बृजसुन्दर और कांस्टेबल दिलीप कुमार की टीम ने संदिग्ध कोचों में छापेमारी शुरू की। तलाशी के दौरान तीन युवकों के पास आठ छोटे बच्चे मिले। जब उनसे गहन पूछताछ की गई तो तस्करों के दावों की पोल खुल गई और यह स्पष्ट हो गया कि बच्चों को पंजाब में बाल मजदूरी के दलदल में धकेलने की योजना थी।

पकड़े गए तस्करों की पहचान कटिहार जिला के लक्ष्मीपुर निवासी रंजीत कुमार, पूर्णिया जिला सिरपुर निवासी सूरज कुमार मंडल और मधेपुरा निवासी मोहम्मद कमल वार्ड संख्या 3, के रूप में हुई है। पूछताछ में पता चला है कि ये तस्कर गरीब परिवारों के बच्चों को बहला-फुसलाकर पंजाब की फैक्ट्रियों और खेतों में मजदूरी कराने के लिए ले जा रहे थे। आरपीएफ ने रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों और तीनों तस्करों को तत्काल अग्रिम कार्रवाई के लिए जीआरपी थाना छपरा जंक्शन के सुपुर्द कर दिया।

जीआरपी ने तीनों आरोपियों के विरुद्ध कांड संख्या 12/26 भारतीय न्याय संहिता की धारा 143(5), जेजे एक्ट की धारा 79 और बाल एवं किशोर श्रम अधिनियम की धारा 3(14) के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई आरंभ कर दी है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इस गिरोह के तार और कहां-कहां जुड़े हैं और क्या पूर्व में भी इन्होंने इसी तरह बच्चों की तस्करी की है। सुरक्षित बचाए गए बच्चों को काउंसलिंग के बाद बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जाएगा ताकि उन्हें उनके परिजनों तक पहुंचाया जा सके।

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