गुमला की लापता बच्ची मामले में हाई कोर्ट सख्त, एसपी-एसडीपीओ हुए पेश, नार्को टेस्ट पर नजर

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रांची, 09 जून — झारखंड उच्च न्यायालय में वर्ष 2018 से लापता गुमला की छह वर्षीय बच्ची की बरामदगी से जुड़े मामले में मंगलवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान गुमला के पुलिस अधीक्षक (एसपी), चैनपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) और मामले के अनुसंधानकर्ता (आईओ) अदालत में उपस्थित हुए तथा जांच की प्रगति से संबंधित जानकारी न्यायालय के समक्ष रखी।

महिला आरोपित के नार्को टेस्ट की अनुमति मांगी

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में एक महिला आरोपित का नार्को टेस्ट कराने के लिए संबंधित निचली अदालत से अनुमति मांगी गई है। इस संबंध में बुधवार को सुनवाई निर्धारित है। अनुमति मिलने के बाद आगे की जांच प्रक्रिया को गति दी जाएगी।

जांच पूरी करने के लिए मांगा अतिरिक्त समय

राज्य सरकार ने मामले की जांच पूरी करने के लिए उच्च न्यायालय से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया। इसके बाद न्यायमूर्ति Sujit Narayan Prasad और न्यायमूर्ति Pradeep Srivastava की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए नई तिथि निर्धारित कर दी।

एसपी और एसडीपीओ को मिली व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट

अदालत ने गुमला के एसपी और चैनपुर के एसडीपीओ को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट दे दी। हालांकि, मामले के अनुसंधानकर्ता (आईओ) को अगली सुनवाई में भी अदालत के समक्ष उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है, ताकि जांच की प्रगति की प्रत्यक्ष जानकारी ली जा सके।

2018 से लापता है बच्ची

उल्लेखनीय है कि गुमला जिले की छह वर्षीय बच्ची सितंबर 2018 से लापता है। बच्ची की बरामदगी और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर उसकी मां चंद्रमुनि उराइन ने झारखंड उच्च न्यायालय में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की थी। इसी याचिका पर उच्च न्यायालय लगातार सुनवाई कर रहा है और जांच एजेंसियों से समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट तलब कर रहा है।

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