रांची: झारखंड में उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले में आरोपित सोनू शर्मा और मोनू कुमार की अग्रिम जमानत याचिका पर शनिवार को अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत में सुनवाई हुई। हालांकि केस डायरी प्रस्तुत नहीं होने के कारण मामले में अगली तारीख निर्धारित कर दी गई।
केस डायरी पेश न होने पर अदालत सख्त
सुनवाई के दौरान अनुसंधानकर्ता अदालत में उपस्थित हुए, लेकिन केस डायरी प्रस्तुत नहीं कर सके। उन्होंने इसके लिए अतिरिक्त समय की मांग की। अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए अगली सुनवाई तक अद्यतन केस डायरी हर हाल में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
अंतरिम राहत बरकरार
अदालत ने आरोपितों के खिलाफ किसी भी प्रकार की पीड़क कार्रवाई पर लगी अंतरिम रोक को अगले आदेश तक जारी रखने का निर्देश दिया है। इससे पहले भी कोर्ट ने केस डायरी तलब की थी, लेकिन उसे प्रस्तुत नहीं किया गया था।
सॉल्वर गैंग और पेपर लीक का आरोप
यह मामला उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक और सॉल्वर गैंग की संलिप्तता से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र हल कराकर और उत्तर रटवाकर परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था।
अब तक की कार्रवाई
इस मामले में अब तक 160 आरोपितों को जमानत मिल चुकी है, जबकि 6 आरोपितों की जमानत याचिका खारिज की जा चुकी है।
166 अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी
11 अप्रैल को पुलिस ने तमाड़ थाना क्षेत्र के रड़गांव में छापेमारी कर लगभग 166 लोगों को हिरासत में लिया था। इस दौरान गिरोह के कथित सरगना समेत पांच प्रमुख सदस्य—अतुल वत्स, विकास कुमार, शेर सिंह, आशीष कुमार और योगेश प्रसाद—को भी गिरफ्तार किया गया था।
जांच में क्या सामने आया
जांच में खुलासा हुआ कि अभ्यर्थियों को एक जगह इकट्ठा कर उनसे प्रश्नों के उत्तर रटवाए जा रहे थे। इस दौरान उनके मोबाइल फोन और एडमिट कार्ड भी जब्त कर लिए गए थे। कुछ अभ्यर्थियों से बैंक चेक लेने की भी बात सामने आई है।
जांच जारी
इस मामले में तमाड़ थाना में प्राथमिकी दर्ज कर जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
यह मामला राज्य की भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।






