Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

उत्तराखंड में तीसरी बार सत्ता की तैयारी में भाजपा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के लिए भी बनाई रणनीति

Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

Share

– अटल की विरासत, विकास और सनातन संस्कृति के साथ चुनावी रणभूमि तैयार

– विकास मॉडल और संगठन विस्तार के साथ चुनावी नैरेटिव गढ़ रही भाजपा

- Sponsored -
Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

देहरादून। उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और झारखंड तीनों ही वर्ष 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी की दूरदर्शिता से बने राज्य हैं और अब भाजपा इन्हें चुनावी रणनीति का केंद्र बना रही है। भाजपा उत्तराखंड में जीत की हैट्रिक लगाने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ और झारखंड को भी अपने विकास मॉडल, संगठन विस्तार और चुनावी रणनीति के जरिए पूरा ध्यान केंद्रित कर रही है। इन राज्याें में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी इन राज्यों को अटल की विरासत, सनातन संस्कृति और विकास की राजनीति के साथ जोड़कर बड़ा चुनावी नैरेटिव गढ़ रही है।

अटल ने जो बीज बोया, भाजपा उसे बना रही वटवृक्ष

- Sponsored -
Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

हाल में उत्तराखंड में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि जब अटलजी ने उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और झारखंड बनाए थे, तब विपक्ष सवाल उठाता था कि छोटे राज्य कैसे चलेंगे। आज वही राज्य विकास की दौड़ में आगे हैं। भाजपा की सरकारें सनातन, विकास और सुशासन को साथ लेकर चल रही हैं और यही मॉडल विकसित भारत का रास्ता बनेगा। शाह ने कहा कि आने वाले चुनाव इन राज्यों के विकास की दिशा तय करेंगे। दरअसल, उत्तराखंड में 2027 में विधानसभा चुनाव होना है। वहीं छत्तीसगढ़ में 2028 तो झारखंड में 2029 में विधानसभा चुनाव होना है।

आंदोलन से तप कर बनें राज्य, अटल ने दिया राजनीतिक आकार

- Sponsored -
Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

इन तीनों राज्यों का निर्माण लंबे जनआंदोलनों और क्षेत्रीय अस्मिता की लड़ाई का परिणाम था। पहाड़ की पहचान और विकास की मांग को लेकर चले आंदोलन के बाद उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड बना। वर्ष 1994 का रामपुर तिराहा कांड आंदोलन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ और 9 नवंबर 2000 को राज्य अस्तित्व में आया। झारखंड की मांग लगभग एक सदी पुरानी रही। आदिवासी पहचान, खनिज संपदा पर स्थानीय अधिकार और क्षेत्रीय विकास के मुद्दों ने आंदोलन को ताकत दी। अंततः 15 नवंबर 2000 को राज्य बना। छत्तीसगढ़ में भी अलग भाषा, संस्कृति और प्रशासनिक सुविधा की मांग लंबे समय से उठती रही और 1 नवंबर 2000 को यह मध्य प्रदेश से अलग होकर नया राज्य बना। साल 2000 को भारतीय राजनीति में नए राज्यों का वर्ष कहा गया, क्योंकि इन तीनों राज्यों के बनने के बाद देश में राज्यों की संख्या 25 से बढ़कर 28 हो गई।

पहचान और विकास साथ-साथ

भाजपा आज इन राज्यों को अपनी राजनीतिक और वैचारिक विरासत से जोड़कर देख रही है। पार्टी का चुनावी संदेश साफ है कि सनातन की जड़ें भी मजबूत हों और विकास की रफ्तार भी तेज हो। उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन और चारधाम परियोजनाएं, छत्तीसगढ़ में खनिज संपदा, कृषि और आदिवासी विकास, झारखंड में औद्योगिक विकास और संसाधनों का बेहतर उपयोग। भाजपा इन तीनों राज्यों को विकसित भारत के मिशन का मजबूत आधार मानती है।

विकसित भारत के मिशन में निर्णायक भूमिका

राजनीतिक विश्लेषक सियाराम पांडेय का मानना है कि ये तीनों राज्य भारत की विविधता और संभावनाओं का प्रतीक हैं। उत्तराखंड आध्यात्मिक और धार्मिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र बन सकता है। छत्तीसगढ़ खनिज और कृषि शक्ति का बड़ा आधार है। झारखंड औद्योगिक विकास और प्राकृतिक संसाधनों का केंद्र है। इसी वजह से भाजपा इन राज्यों को ‘विकसित भारत’ के मिशन से जोड़कर चुनावी रणनीति तैयार कर रही है।

उत्तराखंड : भाजपा की फिर सरकार बनाने की तैयारी

उत्तराखंड में पिछली नौ साल की राज्य सरकार ने विकास और सुशासन का ऐसा मॉडल पेश किया है, जिसे जनता ने सराहा। चारधाम और धार्मिक पर्यटन में निवेश, सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के प्रोजेक्ट, रोजगार और पलायन रोकने के लिए युवा केंद्रित नीतियां। पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व मानना है कि यही वजह है कि उत्तराखंड में भाजपा तीसरी बार सत्ता में लौट सकती है और पार्टी का संदेश साफ है कि सनातन संस्कृति, विकास और सुशासन।

छत्तीसगढ़ : आदिवासी और ग्रामीण विकास पर चुनावी फोकस

छत्तीसगढ़ में भाजपा का चुनावी अभियान आदिवासी समाज, प्राकृतिक संसाधनों और ग्रामीण विकास पर केंद्रित है। खनिज संपदा पर स्थानीय अधिकार, कृषि और रोजगार योजनाओं का जोर, आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन का विस्तार। पार्टी का लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ में सत्ता में लौटकर पिछले कामों को तेज़ी से आगे बढ़ाया जाए और विकास को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया जाए।

झारखंड : औद्योगिक विकास और रोजगार की रणनीति

झारखंड में भाजपा की रणनीति औद्योगिक निवेश और रोजगार के मुद्दों पर आधारित है। संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के जरिए स्थानीय रोजगार, आदिवासी समुदाय और उद्योगपतियों के बीच संतुलन, संगठन और चुनावी तैयारियों में तेजी। भाजपा का मानना है कि झारखंड में भी विकास और सुशासन का मॉडल जनता को आकर्षित करेगा और विपक्ष की कमजोरियों को उजागर करेगा।

Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

Share this article

Facebook
Twitter X
WhatsApp
Telegram
 
April 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930