‘इमरजेंसी के 50 साल: बिहार आंदोलन और आपातकाल’ कार्यक्रम में लोकतंत्र की रक्षा और ऐतिहासिक विरासत पर हुआ मंथन

Share

पटना। हिन्दुस्थान समाचार समूह की ओर से पटना के मीठापुर इंस्टीट्यूशनल एरिया में आयोजित ‘इमरजेंसी के 50 साल : बिहार आंदोलन और आपातकाल’ विषयक कार्यक्रम में बिहार आंदोलन, लोकतंत्र की रक्षा और आपातकाल की विरासत पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग तथा खान एवं भूतत्व मंत्री Pramod Kumar और चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान (CIMP) के निदेशक एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी Kumud Kumar ने अपने विचार रखे।

बिहार आंदोलन लोकतंत्र की रक्षा का जीवंत दस्तावेज : प्रमोद कुमार

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि 1974 के छात्र-युवा आंदोलन और आपातकाल विरोधी संघर्ष की विरासत को सुरक्षित रखना तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाना आज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है।

उन्होंने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक था, लेकिन जनता की लोकतांत्रिक चेतना और संघर्ष ने अंततः लोकतंत्र की पुनर्स्थापना सुनिश्चित की।

मंत्री ने कहा कि बिहार आंदोलन केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए त्याग, संघर्ष, बलिदान और जनशक्ति का जीवंत दस्तावेज है। इसकी वास्तविक कहानी और मूल्यों को युवाओं तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियां लोकतांत्रिक अधिकारों और जिम्मेदारियों के महत्व को समझ सकें।

ऐतिहासिक दस्तावेजों के संरक्षण की जिम्मेदारी

डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान उन्हें बिहार आंदोलन और आपातकाल से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों, अभिलेखों और ऐतिहासिक सामग्रियों के संरक्षण का दायित्व सौंपा गया है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण लोकतांत्रिक इतिहास के अध्ययन और युवा पीढ़ी को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

आपातकाल लोकतंत्र की कठिन परीक्षा थी : डॉ. कुमुद कुमार

कार्यक्रम के स्वागताध्यक्ष एवं चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान के निदेशक डॉ. कुमुद कुमार ने कहा कि 25 जून 1975 को लागू किया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र की सबसे चुनौतीपूर्ण घटनाओं में से एक था।

उन्होंने कहा कि उस समय प्रेस की स्वतंत्रता प्रभावित हुई, नागरिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए और असहमति के स्वरों को दबाने का प्रयास किया गया। हालांकि लोकतंत्र में जनता की आस्था और जनशक्ति ने अंततः लोकतांत्रिक व्यवस्था को पुनर्स्थापित किया।

बिहार ने देश को दिखाई थी राह

डॉ. कुमुद कुमार ने कहा कि लोकतंत्र को बचाने के संघर्ष की चर्चा बिहार के उल्लेख के बिना अधूरी है। उन्होंने बताया कि Jayaprakash Narayan के नेतृत्व में बिहार से उठी ‘संपूर्ण क्रांति’ की आवाज ने पूरे देश को नई दिशा दी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए व्यापक जनजागरण का आधार तैयार किया।

उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक मर्यादाओं के महत्व से परिचित कराने का भी माध्यम है।

लोकतंत्र की मजबूती के लिए नागरिक जागरूकता जरूरी

डॉ. कुमुद कुमार ने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत रह सकता है, जब नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों दोनों के प्रति सजग रहें। उन्होंने मीडिया की भूमिका पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और राष्ट्रीय मूल्यों को मजबूत करने का भी महत्वपूर्ण साधन है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पेशेवर दक्षता विकसित करना नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति उत्तरदायी नागरिक तैयार करना भी है।

लोकतंत्र को सशक्त बनाने की प्रेरणा है बिहार आंदोलन

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि बिहार आंदोलन और आपातकाल विरोधी संघर्ष की विरासत केवल ऐतिहासिक स्मृति नहीं है, बल्कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने की सतत प्रेरणा भी है। लोकतांत्रिक संस्थाओं, नागरिक अधिकारों और राष्ट्रचेतना की रक्षा के लिए समाज को हमेशा सजग और सक्रिय रहने की आवश्यकता है।

Share this article

Facebook
Twitter X
WhatsApp
Telegram
 
September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930