गुमला, 07 नवंबर। आदिवासी नेत्री निशा भगत का शनिवार को उनके पैतृक गांव उरू में गमगीन माहौल के बीच अंतिम संस्कार किया गया। चैनपुर प्रखंड के कुरुमगढ़ थाना क्षेत्र स्थित गांव में शाम चार बजे उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। पिता हांदु भगत ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए सामाजिक, राजनीतिक और पारिवारिक लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। नम आंखों से लोगों ने निशा भगत को अंतिम विदाई दी। इस दौरान ‘निशा भगत अमर रहें’ और ‘निशा भगत को न्याय दो’ के नारे गूंजते रहे।
अंतिम संस्कार में राज्य के कई दिग्गज नेता और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और निशा भगत को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उनकी मौत की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठी।
अंतिम विदाई में पहुंचे कई दिग्गज नेता
निशा भगत को श्रद्धांजलि देने वालों में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, गुमला विधायक भूषण तिर्की, पूर्व सांसद समीर उरांव, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, पूर्व विधायक शिवशंकर उरांव, पूर्व विधायक रामकुमार पाहन, भाजपा नेता मिशिर कुजूर, जिला परिषद अध्यक्ष किरण माला बाड़ा, एसटी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष शनि टोप्पो और आईआरएस निशा उरांव समेत कई गणमान्य लोग शामिल रहे।
अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता मौजूद थे। लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए निशा भगत को न्याय दिलाने की मांग दोहराई।
‘यह आत्महत्या नहीं, बल्कि बलिदान है’: रघुवर दास
अंतिम संस्कार के बाद आयोजित शोकसभा में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी सरकार के कार्यकाल में झारखंड की एक बेटी और आदिवासी नेत्री की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होना बेहद दुखद और चिंताजनक है।
दास ने आरोप लगाया कि राज्य में भू-माफियाओं द्वारा आदिवासियों की जमीन छीनी जा रही है। जो लोग इसके खिलाफ आवाज उठाते हैं, उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने निशा भगत की मौत को सामान्य आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने सरना आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए अपना बलिदान दिया है।
रघुवर दास ने घोषणा की कि गुमला में निशा भगत की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन प्रतिमा का निर्माण नहीं कराता है, तो वे अपने निजी खर्च से उनकी आदमकद प्रतिमा बनवाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने पीड़ित परिवार को सरकार की ओर से एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की।

विधायक भूषण तिर्की ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
गुमला विधायक भूषण तिर्की ने घटना को गंभीर बताते हुए प्रशासन से उच्चस्तरीय और पारदर्शी जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी घटना कैसे हुई, इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं और कथित साजिश के सूत्रधार कौन हैं, इसका जल्द खुलासा होना चाहिए।
विधायक ने कहा कि यदि इस मामले में कोई साजिशकर्ता शामिल है, तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। ऐसे लोगों की जल्द गिरफ्तारी कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि जांच एजेंसियां निष्पक्ष तरीके से काम करेंगी और सरकार के स्तर पर भी निशा भगत को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
न्याय की मांग को लेकर बढ़ा आक्रोश
निशा भगत के अंतिम संस्कार के दौरान नेताओं और स्थानीय लोगों ने एक स्वर में मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। पिता हांदु भगत पहले ही पुलिस को आवेदन देकर बेटी की मौत के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर चुके हैं।
अंतिम विदाई के दौरान लगे न्याय के नारों और नेताओं के बयानों के बाद इस मामले को लेकर इलाके में राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई है। परिवार और समर्थकों की मांग है कि निशा भगत की मौत की परिस्थितियों का निष्पक्ष खुलासा हो तथा यदि किसी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।






