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संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा आरंभ, बांग्लादेश में हिंदुओं की रक्षा पर जोर

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समालखा (हरियाणा)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का शुक्रवार को सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाहक दत्तात्रेय होसबाले ने उद्घाटन किया। इस दौरान सरकार्यवाह की ओर से वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। संघ ने बांग्लादेश सरकार से एक बार फिर आग्रह किया कि वह अपने यहां हिंदुओं के अधिकारों का संरक्षण करे।

तीन दिवसीय यह बैठक हरियाणा के समालखा स्थित माधव सृष्टि परिसर में आयोजित की गई है। प्रतिनिधि सभा के प्रारंभ के बाद यहां सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद ने अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर के साथ पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर एवं प्रदीप जोशी सहित अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।

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बैठक के शुरुआती सत्रों में दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि दी गई तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार के प्रयासों से आए सुधार और मणिपुर में संघ के प्रयासों से आए सकारात्मक परिणामों का स्वागत किया गया। इसके अलावा बांग्लादेश सरकार से एक बार फिर आग्रह किया गया कि हिंदुओं के अधिकारों का वहां संरक्षण प्रदान करे।

सीआर मुकुंद ने बताया कि सरकार्यवाह ने अपने प्रतिवेदन में यह जानकारी दी कि संघ के शताब्दी वर्ष में किए गए प्रयासों से 4 हजार स्थान पर 5 हजार से अधिक शाखाओं में वृद्धि हुई है। गृह संपर्क अभियान के तहत संघ के कार्यकर्ता 10 करोड़ परिवारों तक पहुंचे हैं। तीन लाख से अधिक गांव में संघ के कार्यकर्ता गए हैं। केरल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां संघ के कार्यकर्ता साम्यवादी विचारधारा, मुसलमानों और ईसाई परिवारों से भी मिले हैं। अकेले केरल में 55 हजार से अधिक मुस्लिम और 54 हजार से अधिक ईसाई परिवारों में संघ के कार्यकर्ता संघ और समाज से जुड़े विषय लेकर गए हैं।

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उन्होंने बताया कि शताब्दी वर्ष के नाते 36 हजार से अधिक स्थानों पर हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए हैं। इसमें अरुणाचल के एक दुर्गम क्षेत्र में आयोजित हिंदू सम्मेलन का उदाहरण उल्लेखनीय है। संघ के शताब्दी वर्ष में दो प्रकार के कार्यक्रमों की योजना की गई जिनमें एक संगठन विस्तार और दूसरा समाज की सज्जन शक्ति को सद्भाव, समरसता के लिए संगठित करने का उद्देश्य रखा गया।

मुकुंद ने बताया कि शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की शुरुआत पिछले वर्ष दो अक्टूबर को नागपुर में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद एवं सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत के सान्निध्य में हुई। इससे एक दिन पूर्व भारत सरकार ने संघ शताब्दी वर्ष के उपल्क्ष्य में संघ पर डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया था। वहीं इस दौरान सरसंघचालक भागवत की देश के चार महानगरों में व्याख्यान माला आयोजित की गई। इसमें सरसंघचालक ने 20 से अधिक घंटे में एक हजार से अधिक प्रश्नों का उत्तर दिया।

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मुकुंद ने बताया कि बैठक की शुरुआत में दिवंगत हुए विभिन्न प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इनमें प्रमुख रूप से शिवकथाकार सतगुरुदास महाराज, पर्यावरणविद डॉ. माधव गाडगिल, पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल, पर्यावरण के लिए समर्पित सालुमरदा थिमक्का, पुरातत्वविद केएन दीक्षित, महाराष्ट्र के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, अभिनेता धर्मेंद्र, तमिल फिल्म निर्माता एवीएम सरवनन, मिजोरम के पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल, शिक्षाविद् विनय हेगड़े, कम्युनिस्ट नेता आर नल्लकणु, वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक प्रफुल्ल गोविंद बरुआ के नाम सम्मिलित हैं।

सह सरकार्यवाह मुकुंद के अनुसार समाज हित के लिए सज्जन शक्ति को संगठित करने की दृष्टि से प्रमुख नागरिक संगोष्ठियों के आयोजन भी किए गए हैं। दोनों प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के भीतर पंच परिवर्तन के व्यापक लक्ष्य के लिए वातावरण बन रहा है। इन परिवर्तनों में सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण चेतना, स्व एवं स्वदेशी के लिए गर्व, परिवार व्यवस्था के संरक्षण तथा नागरिक कर्तव्यों के लिए जागरुकता शामिल हैं। इन परिवर्तनों के माध्यम से ही देश और समाज को महान बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य समाज की सज्जन शक्ति को एकत्रित कर राष्ट्र निर्माण के कार्य में आगे बढ़ना है। संघ का यह शताब्दी वर्ष कार्यक्रम अक्टूबर 2026 तक विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से जारी रहेगा। इस अवसर पर मुकुंद ने कहा कि संघ विश्व में शांति एवं सबकी कुशलता की कामना करता है।

सरकार्यवाह की ओर से आज प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार पिछले वर्ष 51,740 स्थानों पर 83,129 शाखाएं संचालित थीं जो अब बढ़कर 55,683 स्थानों पर 88,949 शाखाएं हो गयी हैं। इस प्रकार एक वर्ष में 3,943 नए स्थान जुड़े हैं और शाखाओं की संख्या 5,820 की वृद्धि हुई है। अब तक 46 में से 37 प्रांतों में हुए गृह सम्पर्क अभियान में 10 करोड़ घरों में सम्पर्क कर संघ के विषय में संवाद किया गया। केवल केरल राज्य का आंकड़ा लें तो 55 हजार मुस्लिम घरों में तथा 54 हजार ईसाई घरों में सम्पर्क किया गया। सभी परिवारों ने उत्साह के साथ स्वयंसेवकों का स्वागत-अभिनंदन किया।

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