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वैश्विक तनाव का असर, शेयर बाजार में भारी गिरावट

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नई दिल्ली। घरेलू शेयर बाजार आज एक बार फिर बड़ी गिरावट का शिकार हो गया। पश्चिम एशिया में जारी संकट की वजह से बाजार लगातार दबाव का सामना कर रहा है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका-इजराइल तथा ईरान के बीच जारी जंग की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट बढ़ता नजर आने लगा है। दुनिया भर में निवेशकों ने शेयर बाजार से अपना पैसा निकाल कर डॉलर या ट्रेजरी बॉन्ड जैसे सेफ इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करना शुरू कर दिया है, जिसकी वजह से दुनिया के ज्यादातर शेयर बाजारों में गिरावट का रुख बना हुआ है। इसका असर भारत के शेयर बाजार पर भी साफ-साफ नजर आ रहा है।

माना जा रहा है कि पश्चिम एशिया में जारी जंग के लंबा खिंचने के संकेत की वजह से दुनिया भर के शेयर बाजार में चिंता का माहौल बना हुआ है। इस सप्ताह सेंसेक्स में करीब 4.5 प्रतिशत और निफ्टी में लगभग 4.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। ये दिसंबर 2024 के बाद घरेलू शेयर बाजार की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट होने का संकेत दे रही है।

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खुराना सिक्योरिटीज एंड फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ रवि चंदर खुराना का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट की वजह से कच्चे तेल की कीमत में आई तेजी, कमजोर ग्लोबल संकेतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने घरेलू शेयर बाजार के आज के काम पर काफी असर डाला। इसकी वजह से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सूचकांक धराशायी हो गए।

ईरान द्वारा दो ऑयल टैंकर पर हमला करने की खबर के बाद हॉर्मुज स्ट्रेट के जरिए क्रूड ऑयल की सप्लाई पूरी तरह से बाधित होने की आशंका बन गई है। इसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड आज उछल कर 102.64 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि भारतीय समय के मुताबिक शाम 6 बजे ब्रेंट क्रूड 99.06 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी आज 98.09 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंचने के बाद शाम 6 बजे तक 93.53 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया था। कच्चे तेल की कीमत में आई इस तेजी से भारत समेत दुनिया भर में इन्वेस्टर्स सेंटीमेंट्स पर नकारात्मक असर पड़ा है।

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इसी तरह ग्लोबल मार्केट से भी आज कमजोर संकेत मिले। एशियाई बाजार में आज चौतरफा बिकवाली होती रही। अमेरिकी और यूरोपीय बाजार भी पिछले सत्र के दौरान गिरावट के साथ बंद हुए। बिकवाली के दबाव में डाउ जॉन्स साल 2026 में पहली बार 47 हजार अंक के नीचे पहुंच कर बंद हुआ। इसी तरह नैस्डेक और एसएंडपी 500 इंडेक्स में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। कमजोर ग्लोबल संकेतों ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बनाने का काम किया।

इसके अलावा विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार जारी बिकवाली ने भी घरेलू शेयर बाजार पर दबाव बनाया हुआ है। विदेशी निवेशकों ने अभी तक घरेलू शेयर बाजार से 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक लगातार खरीदारी कर बाजार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बावजूद विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने मार्केट सेंटीमेंट्स पर काफी बुरा असर डाला है।

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बाजार में आई आज की गिरावट के संबंध में टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ तारकेश्वर नाथ वैष्णव का कहना है कि वैश्विक दबाव की वजह से रुपये में लगातार जारी गिरावट ने भी शेयर बाजार पर निगेटिव असर डाला है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमत के कारण रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है। रुपये की कमजोरी की वजह से इंपोर्ट कॉस्ट में भी बढ़ोतरी होने की आशंका बन गई है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा भी बन गया है।

इसके अलावा घरेलू शेयर बाजार में आज मेटल, बैंकिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर में हुई जोरदार बिकवाली ने भी मार्केट सेंटीमेंट्स पर निगेटिव इंपैक्ट डाला। ऑटोमोबाइल सेक्टर में हुई बिकवाली के कारण निफ्टी का ऑटो इंडेक्स आज 3.5 प्रतिशत टूट गया। इसी तरह बीएसई के मेटल इंडेक्स ने आज 4.83 प्रतिशत की गिरावट के साथ आज के कारोबार का अंत किया। वहीं, बैंकिंग इंडेक्स में आज 2.44 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इन तीनों सेक्टर्स में आई जोरदार गिरावट ने शेयर बाजार के पूरे कारोबार को प्रभावित किया, जिसकी वजह से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सूचकांक ओवरऑल बड़ी गिरावट का शिकार हो गए।

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