—वक्ताओं ने विकास और गरीबी उन्मूलन के लिए अलग राज्य को बताया जरूरी
सहरसा, 27 जुलाई। संगीतायन फाउंडेशन के तत्वावधान में सोमवार को विद्यापति भवन, चेतना समिति सभागार में “मिथिला में गरीबी, कारण और निवारण” विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता दूरसंचार विभाग के पूर्व निदेशक और राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री से सम्मानित डॉ. एनपी सेन ने की। कार्यक्रम का संचालन चेतना समिति के सचिव जयदेव मिश्र ने किया।
मिथिला के विकास पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
सेमिनार में कई प्रमुख वक्ताओं ने मिथिला क्षेत्र में गरीबी, पिछड़ेपन और विकास की चुनौतियों पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने गरीबी दूर करने के उपायों और क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक कदमों पर सुझाव दिए।
कार्यक्रम में चेतना समिति के अध्यक्ष विवेकानंद झा, पूर्व आईएएस विजय प्रकाश, डॉ. रत्नेश्वर मिश्र, पूर्व मंत्री विनोद नारायण झा, पूर्व मंत्री राजकुमार पूर्वे, पूर्व मंत्री समीर कुमार महासेठ और पूर्व मंत्री डॉ. मदन मोहन झा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
गरीबी और पिछड़ेपन के आंकड़े किए प्रस्तुत
रोहित कुमार और डॉ. दीप्ती कुमारी ने मिथिला में गरीबी और पिछड़ेपन से जुड़े तथ्य एवं आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।
संगीतायन फाउंडेशन के महासचिव अवनिन्द्र ठाकुर ने अतिथियों, वक्ताओं और उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए सेमिनार के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम संयोजक अंशुमन सिंह ने आधुनिक विकास मॉडल की आवश्यकता पर जोर दिया।
वक्ताओं ने उठाई पृथक मिथिला राज्य की मांग
सेमिनार में शामिल कई वक्ताओं ने मिथिला के विकास के लिए पृथक मिथिला राज्य की मांग उठाई। अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी इंजीनियर शिशिर कुमार झा ने कहा कि आजादी के 79 वर्षों में विभिन्न राजनीतिक दलों ने बिहार में शासन किया, लेकिन मिथिला क्षेत्र की समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि मैथिली को संवैधानिक भाषा का दर्जा मिलने के बावजूद उसे उचित अधिकार नहीं मिला है। उन्होंने दावा किया कि मिथिला के विकास के लिए पृथक राज्य की स्थापना ही एकमात्र समाधान है।
कई विशेषज्ञों ने रखे विचार
विशिष्ट वक्ताओं में इंजीनियर शिशिर कुमार झा के अलावा डॉ. अशोक अविचल, डॉ. प्रेम कांत चौधरी और मदन कुमार झा प्रमुख रूप से शामिल रहे। वक्ताओं ने मिथिला क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को लेकर अपने विचार साझा किए।






