पटना, 23 जुलाई । बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार को वित्त मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री विजेंद्र यादव ने वित्त वर्ष 2024-25 की नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) रिपोर्ट सदन में पेश की। रिपोर्ट में जहां राज्य की अर्थव्यवस्था में 13.09 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, वहीं राजकोषीय घाटा, राजस्व घाटा और केंद्रीय अनुदानों पर बढ़ती निर्भरता जैसी वित्तीय चुनौतियों की भी ओर संकेत किया गया है।
कैग रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में बिहार के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में पिछले वर्ष की तुलना में 13.09 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बिहार की हिस्सेदारी 2.86 प्रतिशत से बढ़कर 3.0 प्रतिशत हो गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में राज्य का राजस्व व्यय 14.96 प्रतिशत बढ़कर 2,19,015.21 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि राजस्व प्राप्तियों में 13.09 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। जीएसडीपी के अनुपात में राजस्व व्यय 24.57 प्रतिशत से घटकर 22.08 प्रतिशत पर आ गया।
कैग ने बताया कि ब्याज भुगतान, वेतन और पेंशन समेत 86,235.64 करोड़ रुपये का प्रतिबद्ध व्यय राज्य के कुल राजस्व व्यय का 39.37 प्रतिशत और कुल राजस्व प्राप्तियों का 39.43 प्रतिशत रहा। वर्ष 2021-22 से 2024-25 के दौरान प्रतिबद्ध व्यय और सब्सिडी मिलाकर राजस्व प्राप्तियों एवं व्यय का 43 से 48 प्रतिशत तक हिस्सा रहे।
राजस्व अधिशेष से घाटे में पहुंचा राज्य
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में बिहार को 357.38 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हुआ, जबकि पिछले वित्त वर्ष में 2,833.06 करोड़ रुपये का राजस्व अधिशेष था। इसी तरह राज्य का राजकोषीय घाटा 2023-24 के 35,659.88 करोड़ रुपये से बढ़कर 41,222.50 करोड़ रुपये हो गया।
हालांकि राजस्व प्राप्तियों में 25,310.60 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई, लेकिन कुल राजस्व का लगभग 59 प्रतिशत हिस्सा अब भी केंद्रीय हस्तांतरणों पर निर्भर है, जिससे राज्य की वित्तीय स्वायत्तता सीमित बनी हुई है।
गैर-कर राजस्व लक्ष्य से पीछे
कैग ने कहा कि वर्ष 2024-25 में गैर-कर राजस्व जीएसडीपी का केवल 0.58 प्रतिशत रहा। राज्य 15वें वित्त आयोग और बिहार राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम के तहत निर्धारित गैर-कर राजस्व लक्ष्य हासिल नहीं कर सका।
गैर-लौह खनन एवं धातुकर्म उद्योग से 5,781.36 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई, जो कुल गैर-कर राजस्व का 61.16 प्रतिशत रही।
पूंजीगत व्यय और देनदारियां दोनों बढ़ीं
रिपोर्ट के अनुसार, पूंजीगत प्राप्तियां 60,314 करोड़ रुपये से बढ़कर 66,164.50 करोड़ रुपये हो गईं। इनमें 49,549.32 करोड़ रुपये का आंतरिक ऋण प्रमुख स्रोत रहा।
जीएसडीपी के अनुपात में पूंजीगत व्यय 3.21 प्रतिशत से बढ़कर 3.88 प्रतिशत हुआ। वहीं राज्य की कुल बकाया देनदारियों में 15.15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
कैग ने यह भी बताया कि सरकार ने वर्ष 2024-25 में 31,036.15 करोड़ रुपये की गारंटी जारी की, जो वित्तीय उत्तरदायित्व अधिनियम के तहत निर्धारित 25,256.75 करोड़ रुपये की सीमा से अधिक है।
बजट का पूरा उपयोग नहीं
रिपोर्ट के अनुसार, 3,64,518.87 करोड़ रुपये के कुल बजट में से केवल 2,87,178.49 करोड़ रुपये यानी 78.78 प्रतिशत राशि ही खर्च की गई। इससे 77,340.38 करोड़ रुपये की बचत हुई, जबकि बचत का केवल 13.43 प्रतिशत ही सरकार ने औपचारिक रूप से समर्पित किया।
कैग ने इसे अवास्तविक बजट अनुमान और बजट निर्माण व व्यय के बीच समुचित समन्वय की कमी का संकेत बताया।
केंद्र प्रायोजित योजनाओं में भी अनियमितताएं
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य ने केंद्र प्रायोजित योजनाओं में 441.29 करोड़ रुपये का आवश्यक राज्यांश कम जारी किया। इसके अलावा केंद्रांश और राज्यांश को संबंधित खातों में स्थानांतरित करने में क्रमशः 167 और 246 दिनों तक की देरी हुई, जिससे अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा।
पीडी खाते और सार्वजनिक उपक्रमों पर भी सवाल
कैग ने बताया कि मार्च 2025 तक 252 व्यक्तिगत जमा (पीडी) खातों में 2,659.57 करोड़ रुपये शेष थे, लेकिन इनमें से केवल 16 खातों का ही सत्यापन कराया गया। इसे कमजोर आंतरिक वित्तीय नियंत्रण का संकेत बताया गया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि राज्य सरकार ने 34 कार्यशील एवं अकार्यशील सार्वजनिक उपक्रमों को 29,215.17 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता प्रदान की, जबकि कई उपक्रमों के लेखे एक से 48 वर्षों तक लंबित हैं। साथ ही राज्य सरकार ने सार्वजनिक उपक्रमों के लिए अब तक कोई लाभांश नीति भी निर्धारित नहीं की है।






