पटना: बिहार में करीब एक दशक से लागू शराबबंदी को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) की एक रिपोर्ट में नियंत्रित तरीके से शराब की बिक्री शुरू करने और आबकारी कर व्यवस्था बहाल करने की सिफारिश के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आने लगी है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने शराबबंदी खत्म करने की संभावना को सिरे से खारिज किया है, जबकि JDU सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने इसकी समीक्षा की जरूरत बताई है।
NCAER की रिपोर्ट से छिड़ी नई बहस
NCAER की स्टडी में बिहार में पूर्ण शराबबंदी खत्म कर नियंत्रित तरीके से शराब की बिक्री शुरू करने और आबकारी कर व्यवस्था बहाल करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा होने पर राज्य के अपने राजस्व में करीब 14 से 15 फीसदी तक की वृद्धि हो सकती है।
रिपोर्ट में शराबबंदी के बाद अवैध शराब की तस्करी, दूसरे नशीले पदार्थों के इस्तेमाल और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया है।
JDU प्रवक्ता बोले- ‘जो इसे छुएगा भस्म हो जाएगा’
NCAER की रिपोर्ट पर JDU प्रवक्ता नीरज कुमार ने शराबबंदी खत्म करने की किसी भी संभावना को खारिज किया। उन्होंने कहा कि शराबबंदी से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव आया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नीतीश कुमार की इस नीति की सराहना की थी।
उन्होंने कहा, “बिहार में शराबबंदी लागू रहेगी, जो इसे छुएगा भस्म हो जाएगा।” नीरज कुमार ने यह भी कहा कि बिहार में गुजरात मॉडल लागू नहीं होगा।
JDU सांसद बोले- शराबबंदी की समीक्षा होनी चाहिए
वहीं, JDU सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने शराबबंदी को लेकर अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी लागू है और वह इससे संतुष्ट हैं, लेकिन यह भी संभव नहीं है कि कानून के बावजूद कहीं भी शराब उपलब्ध न हो।
उन्होंने कहा कि शराबबंदी लागू होने के बाद पहले की तुलना में सार्वजनिक स्थानों पर शराब के कारण होने वाली मारपीट और अव्यवस्था में कमी आई है। हालांकि, उन्होंने नियंत्रण के साथ शराबबंदी की समीक्षा की जरूरत बताई।
मद्य निषेध मंत्री ने भी दिए सख्ती के संकेत
इससे पहले बिहार के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री मदन सहनी ने शराबबंदी कानून के उल्लंघन को लेकर सख्त रुख अपनाया था। उन्होंने कहा था कि 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद कुछ लोग कानून का उल्लंघन कर रहे हैं।
उन्होंने संकेत दिया कि अब जिस ब्रांड की शराब पकड़ी जाएगी, उस कंपनी के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे अवैध शराब के कारोबार और तस्करी में शामिल कंपनियों पर सरकार की सख्ती बढ़ने के संकेत मिले हैं।
जीतन राम मांझी भी कर चुके हैं समीक्षा की मांग
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी लंबे समय से शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते रहे हैं। NCAER की रिपोर्ट के बाद उन्होंने गुजरात की तर्ज पर बिहार में शराबबंदी लागू करने की बात कही है।
RJD ने सरकार पर साधा निशाना
विपक्षी RJD विधायक भाई वीरेंद्र ने भी शराबबंदी को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी बिना पर्याप्त सर्वे के लागू की गई थी।
उन्होंने शराब तस्करी पर सवाल उठाते हुए कहा कि नेपाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमाओं से होने वाली तस्करी पर सरकार को प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।
BJP बोली- अंतिम फैसला कैबिनेट का होगा
BJP प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा कि विभिन्न शोध संस्थानों की रिपोर्ट समय-समय पर आती हैं और सरकार सभी विषयों पर विचार करती है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी का फैसला सामूहिक था और 2016 में लगभग सभी राजनीतिक दलों ने इसका समर्थन किया था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शराबबंदी की समय-समय पर समीक्षा होती रही है और नई रिपोर्ट के निष्कर्षों पर भी विचार किया जाएगा। आगे क्या फैसला लिया जाएगा, यह कैबिनेट का सामूहिक निर्णय होगा। फिलहाल बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है।
शराबबंदी पर NCAER की रिपोर्ट के बाद अब बहस सिर्फ इसके सामाजिक प्रभाव तक सीमित नहीं रही, बल्कि राजस्व, कानून के क्रियान्वयन और राजनीतिक प्रतिबद्धता भी चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।





