पटना, 24 सितंबर। बिहार में सितंबर के आखिरी सप्ताह में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदल गया है। बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव के प्रभाव से राज्य के कई हिस्सों में अगले 48 से 72 घंटों के दौरान भारी बारिश, तेज आंधी और वज्रपात की स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग ने अलग-अलग इलाकों के लिए मौसम की स्थिति को देखते हुए चेतावनी जारी की है।
मानसून की विदाई का समय नजदीक आने के बावजूद राज्य में बारिश का एक और सक्रिय दौर शुरू होने की संभावना है। मौसम में बदलाव का असर उत्तर, सीमांचल, मध्य और दक्षिण बिहार के कई जिलों में देखने को मिल सकता है।
बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम से बदला मौसम
मौसम में इस बदलाव की मुख्य वजह बंगाल की खाड़ी में बना दबाव बताया जा रहा है। इसके प्रभाव से बिहार के ऊपर बादलों की सक्रियता बढ़ने और कई इलाकों में तेज बारिश होने की संभावना है।
अगले दो से तीन दिनों के दौरान कुछ स्थानों पर भारी बारिश के साथ तेज हवाएं और वज्रपात भी हो सकता है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
उत्तर और पश्चिमी बिहार में भारी बारिश की संभावना
उत्तर और पश्चिमी बिहार के सीवान, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज और मुजफ्फरपुर में बारिश का असर अधिक देखने को मिल सकता है। इन जिलों के निचले इलाकों में जलजमाव और स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका को देखते हुए सतर्क रहने की जरूरत है।
बारिश के दौरान निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
सीमांचल में फिर बढ़ सकती है परेशानी
पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और सुपौल में भी मौसम के सक्रिय रहने की संभावना है। इन इलाकों में पहले से कई नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। ऐसे में भारी बारिश होने पर नदियों के आसपास और निचले इलाकों में परेशानी बढ़ सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार इन जिलों में अगले दो दिनों के दौरान तेज बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं।
पटना, भागलपुर और गया में भी बारिश के आसार
राजधानी पटना के साथ भागलपुर और गया में भी मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इन इलाकों में बारिश रुक-रुककर हो सकती है।
तेज हवाओं के साथ बारिश होने पर सामान्य जनजीवन प्रभावित हो सकता है। सड़कों पर जलजमाव के कारण यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका है।
40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं
मौसम में बदलाव के दौरान कई इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। कुछ संवेदनशील इलाकों में आंधी की रफ्तार इससे अधिक भी हो सकती है।
तेज हवा के कारण पेड़, बिजली के खंभे और कमजोर संरचनाओं के क्षतिग्रस्त होने का खतरा रहता है। ऐसे में लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।
वज्रपात को लेकर विशेष सावधानी जरूरी
बारिश के साथ वज्रपात का खतरा भी बना रहेगा। अचानक काले बादल घिरने और गरज-चमक शुरू होने पर खुले मैदान, खेत, पेड़ के नीचे या जलाशयों के आसपास खड़े होने से बचना चाहिए।
आपदा प्रबंधन की ओर से भी लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहने और स्थानीय स्तर पर जारी चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी जाती है।
आंधी के दौरान पेड़ और होर्डिंग गिरने का खतरा
तेज आंधी के दौरान बड़े पेड़ों और होर्डिंग्स के गिरने का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों को ऐसे स्थानों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।
राष्ट्रीय राजमार्गों और ग्रामीण सड़कों पर जलजमाव वाले रास्तों से गुजरने से भी बचना चाहिए। सड़क पर पेड़ या बिजली के तार गिरने से आवागमन बाधित हो सकता है।
तापमान में भी गिरावट के संकेत
बारिश और बादलों की सक्रियता बढ़ने के कारण तापमान में भी गिरावट आने की संभावना है। मौसम में बदलाव के साथ दिन और रात के तापमान में करीब 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक कमी आ सकती है। इससे रात के समय हल्की ठंडक का अहसास शुरू हो सकता है।
मौसम अलर्ट को नजरअंदाज न करें
मौसम विभाग की ओर से जारी चेतावनियों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। खासकर बारिश और वज्रपात के दौरान लोगों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए।
घर से निकलने से पहले मौसम की ताजा स्थिति और स्थानीय चेतावनी की जानकारी जरूर लें। किसानों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भी मौसम में होने वाले बदलाव पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है।






