नेपाल की बालेन्द्र सरकार को झटका, संवैधानिक परिषद से जुड़े प्रावधान पर राष्ट्रपति ने जताई आपत्ति, सभी 6 अध्यादेश रोके

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काठमांडू, 30 अप्रैल। नेपाल में बालेन्द्र शाह से जुड़ी सरकार को बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने सरकार द्वारा भेजे गए सभी छह अध्यादेशों को फिलहाल रोक दिया है।

संवैधानिक विशेषज्ञों से परामर्श के बाद होगा फैसला

राष्ट्रपति ने इन अध्यादेशों पर तुरंत मंजूरी देने के बजाय संवैधानिक विशेषज्ञों से सलाह लेने का निर्णय लिया है। इसके लिए काठमांडू स्थित शीतल निवास में विशेषज्ञों की बैठक बुलाई गई है, जिसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।

किन मुद्दों से जुड़े हैं अध्यादेश

सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश कई अहम क्षेत्रों से जुड़े हैं, जिनमें—

  • सार्वजनिक निकायों में नियुक्तियों को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाना
  • राजनीतिक हस्तक्षेप को कम करना
  • सार्वजनिक निर्माण कार्यों में तेजी लाना
  • सहकारी संस्थाओं के छोटे जमाकर्ताओं की रकम वापस दिलाना
  • भूमि, मालपोत और नापी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना

इनमें संवैधानिक परिषद से जुड़े कानून, सहकारी अधिनियम, सार्वजनिक खरीद कानून और विश्वविद्यालय-स्वास्थ्य संस्थानों से संबंधित संशोधन भी शामिल हैं।

संवैधानिक परिषद प्रावधान पर विवाद

राष्ट्रपति के मीडिया सलाहकार किरण पोखरेल के अनुसार, सबसे बड़ा विवाद संवैधानिक परिषद से जुड़े अध्यादेश पर है। प्रस्तावित संशोधन के तहत परिषद के 6 में से 3 सदस्य मिलकर निर्णय ले सकते हैं, जबकि पहले राष्ट्रपति इस तरह के प्रावधान पर आपत्ति जता चुके हैं।

पहले भी लौटा चुके हैं विधेयक

यह पहली बार नहीं है जब राष्ट्रपति ने इस तरह का कदम उठाया है। इससे पहले भी इसी मुद्दे से जुड़े एक विधेयक को उन्होंने पुनर्विचार के लिए संसद को वापस भेज दिया था।

फिलहाल, सभी की नजर अब इस बात पर है कि संवैधानिक सलाह के बाद राष्ट्रपति क्या निर्णय लेते हैं, क्योंकि इसका सीधा असर नेपाल की प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था पर पड़ सकता है।

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