नई दिल्ली — केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर डॉ. मुखर्जी नहीं होते तो आज कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं होता और असम तथा पश्चिम बंगाल का बड़ा भाग पाकिस्तान में चला गया होता।
सहकारिता मंत्रालय के कार्यक्रम में संबोधन
नई दिल्ली में सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शाह ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने अपना पूरा जीवन भारतीयता, भारत माता के प्रति श्रद्धा और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को स्थापित करने में समर्पित कर दिया। उनके विचारों ने करोड़ों कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया है।
‘दो विधान, दो प्रधान, दो निशान’ के खिलाफ संघर्ष
गृहमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चल सकते’ के सिद्धांत को लेकर आंदोलन का नेतृत्व किया और इसके लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद 370 हटाकर उनके इस संकल्प को साकार किया।
विभाजन के संदर्भ में टिप्पणी
अमित शाह ने कहा कि देश के विभाजन के इतिहास को समझने वाले जानते हैं कि यदि डॉ. मुखर्जी ने उस समय के कांग्रेस नेतृत्व को चुनौती नहीं दी होती, तो असम और पश्चिम बंगाल का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान में शामिल हो गया होता। उनके प्रयासों के कारण ही ये क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा बने रहे।
देशभर में होंगे कार्यक्रम
शाह ने बताया कि केंद्र सरकार डॉ. मुखर्जी की 125वीं जयंती पूरे देश में बड़े स्तर पर मनाएगी। उनके विचारों और योगदान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
भारतीय मूल्यों पर आधारित शासन का दृष्टिकोण
उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का मानना था कि भारत का शासन अपनी सांस्कृतिक परंपराओं, स्थानीय मान्यताओं और राष्ट्रीय मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए। उनका पूरा सार्वजनिक जीवन इसी विचारधारा के प्रति समर्पित रहा।






