Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

डिजिटल अरेस्ट का बड़ा जाल, 15 करोड़ की ठगी में आठ आरोपी उप्र, गुजरात, ओडिशा से गिरफ्तार

Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

Share

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने डिजिटल अरेस्ट करके बुजुर्गों को डराकर करोड़ों की ठगी करने के मामले में उत्तर प्रदेश, गुजरात और ओडिशा से आठ आरोपिताें को गिरफ्तार किया है।

इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस के पुलिस उपायुक्त विनित कुमार ने शनिवार को बताया कि यह गिरोह कंबोडिया और नेपाल से संचालित हो रहा था। पकड़े गए आरोपितों की पहचान पटेल दिव्यांग (30), शितोले कृतिक (26), अरुण कुमार तिवारी (45), महावीर शर्मा उर्फ नील (27), प्रद्युम्न तिवारी, अंकित मिश्रा, भूपेंद्र कुमार मिश्रा और आदेश कुमार सिंह (36) के रूप में हुयी है।

- Sponsored -
Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

उन्होंने बताया कि 77 वर्षीय पीड़िता को 24 दिसंबर 2025 को एक फोन कॉल आया, जिसमें बताया गया कि उनके नाम से जारी सिम कार्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शामिल है। इसके बाद उन्हें व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर फर्जी सीबीआई और पुलिस अधिकारी बनकर दिखाया गया और जाली गिरफ्तारी वारंट के जरिए डराया गया। आरोपितों ने व्हाट्सएप पर फर्जी कोर्ट की कार्यवाही तक करवाई और पीड़िता एवं उनके पति को लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा। दंपति से कहा गया कि वे अपनी सभी जमा पूंजी, एफडी और शेयर निवेश की राशि तथाकथित ‘आरबीआई अनिवार्य खाते’ में जांच के लिए ट्रांसफर करें। ठगों ने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होते ही पूरी रकम वापस कर दी जाएगी। इस झांसे में आकर पीड़िता ने आठ अलग-अलग लेन-देन में कुल 14 करोड़ 84 लाख 26 हजार 954 रुपये ट्रांसफर कर दिए।

मामले की शिकायत पर 10 जनवरी 2026 को स्पेशल सेल, इएफएसओ थाना में संबंधित धाराओं में ई-एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद इएफएसओ की टीम ने डिजिटल फुटप्रिंट, बैंक खातों और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर देश के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ छापेमारी की। जांच के दौरान गुजरात के वडोदरा से पटेल दिव्यांग को गिरफ्तार किया गया, जिसके खाते में पीड़िता से करीब चार करोड़ रुपये आए थे। इसके बाद वडोदरा, भुवनेश्वर, वाराणसी और लखनऊ से अन्य आरोपितों को दबोचा गया।

- Sponsored -
Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

गिरफ्तार आरोपितों में एनजीओ संचालक, प्राइवेट नौकरी करने वाले, डेटा एंट्री ऑपरेटर और कोचिंग देने वाले लोग भी शामिल हैं, जो म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने और ठगी की रकम को इधर-उधर करने का काम कर रहे थे। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि सभी आरोपित अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह के इशारे पर म्यूल अकाउंट्स का संचालन कर रहे थे और ठगी की रकम को कई खातों में घुमाकर निकालते थे। आरोपितों के कब्जे से सात मोबाइल फोन और चेक बुक्स बरामद की गयी हैं।

दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सीबीआई, पुलिस या आरबीआई के नाम पर आने वाले किसी भी कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें। किसी भी संदिग्ध कॉल की तुरंत पुलिस को सूचना दें। पुलिस का कहना है कि इस संगठित और गंभीर साइबर अपराध में शामिल अन्य लोगों की तलाश और धन के पूरे ट्रेल की जांच अभी जारी है।

- Sponsored -
Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →
Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

Share this article

Facebook
Twitter X
WhatsApp
Telegram
 
May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031