पटना, 06 सितंबर। बिहार में सरकारी अस्पतालों के लिए डस्टबिन खरीद को लेकर सियासी विवाद लगातार गहराता जा रहा है। राजद सांसद सुधाकर सिंह ने रविवार को प्रेस कांफ्रेंस कर सरकार पर खरीद प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगाया। उन्होंने डस्टबिन दिखाते हुए दावा किया कि करीब 305 करोड़ रुपये के बजट में लगभग 275 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। सुधाकर सिंह ने इस मामले में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय को भी जिम्मेदार ठहराया।
डस्टबिन दिखाकर खरीद पर उठाए सवाल
सुधाकर सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस में एक डस्टबिन दिखाते हुए कहा कि उसमें पानी भरकर जांचने पर उसकी क्षमता करीब 60 लीटर निकली। उन्होंने दावा किया कि इस तरह के डस्टबिन में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक की बाजार कीमत बेहद कम है और सामान्य तौर पर प्लास्टिक का डस्टबिन 8 से 10 रुपये प्रति पीस की कीमत में उपलब्ध हो जाता है। इसके बावजूद सरकारी खरीद में इसकी कीमत 100 रुपये से अधिक बताई गई।
उन्होंने कहा कि सवाल सिर्फ एक डस्टबिन की कीमत का नहीं, बल्कि पूरी खरीद प्रक्रिया और इसके लिए तय किए गए बजट का है।
305 करोड़ के बजट में 275 करोड़ के घोटाले का आरोप
सुधाकर सिंह ने दावा किया कि पूरी खरीद का बजट करीब 305 करोड़ रुपये था और इसमें लगभग 90 प्रतिशत राशि का घोटाला हुआ है। उनके अनुसार करीब 275 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता हुई, जबकि अस्पतालों के लिए वास्तविक सामान की खरीद पर केवल 25 से 30 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
उन्होंने कहा कि इस मामले में दस्तावेजों और खरीद प्रक्रिया की विस्तृत जांच की जरूरत है।
मंगल पांडेय पर सीधे साधा निशाना
राजद सांसद ने कहा कि 10 लाख रुपये से अधिक की खरीद के लिए संबंधित विभाग के मंत्री की स्वीकृति आवश्यक होती है। उनके अनुसार डस्टबिन खरीद से जुड़ी फाइल तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के पास स्वीकृति के लिए गई थी।
सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया, “मंगल पांडेय इसमें पूरी तरह से दोषी हैं।” उन्होंने कहा कि इस मामले में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
टेंडर कमेटी और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
सुधाकर सिंह ने खरीद प्रक्रिया में टेंडर कमेटी और अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि निगम स्तर पर खरीद से जुड़े निर्णय लिए जाते हैं और टेंडर कमेटी के एमडी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि एमडी की नियुक्ति सरकार करती है।
उन्होंने विकास आयुक्त की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए सरकार पर कथित वित्तीय अनियमितताओं को संरक्षण देने का आरोप लगाया। हालांकि ये सभी आरोप राजद सांसद के दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
15,490 रुपये प्रति डस्टबिन की कीमत पर विवाद
डस्टबिन खरीद का विवाद उस समय सामने आया, जब सरकारी अस्पतालों के लिए मेडिकल वेस्ट डस्टबिन की खरीद में प्रति यूनिट करीब 15,490 रुपये की दर सामने आने का दावा किया गया। विपक्ष का आरोप है कि बाजार में सामान्य तौर पर 500 से 1,500 रुपये के आसपास मिलने वाले डस्टबिन की खरीद कई गुना अधिक कीमत पर की गई।
इसी आधार पर राजद ने सरकार पर 617 करोड़ रुपये के कथित डस्टबिन घोटाले का आरोप लगाया है। हालांकि सुधाकर सिंह ने रविवार को करीब 305 करोड़ रुपये के बजट में 275 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का दावा किया।
खरीद प्रक्रिया 2023 में अंतिम रूप दिए जाने का दावा
यह मामला स्वास्थ्य विभाग से जुड़े संस्थागत टेंडर और मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के लिए की गई खरीद से जुड़ा बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस खरीद प्रक्रिया को वर्ष 2023 में अंतिम रूप दिए जाने का दावा सामने आया है।
इसी वजह से इस मामले को लेकर अलग-अलग राजनीतिक कार्यकालों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खरीद प्रक्रिया शुरू होने के समय और उसे अंतिम रूप दिए जाने के समय स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी अलग-अलग राजनीतिक गठबंधनों के नेताओं के पास होने के दावे किए जा रहे हैं।
प्रशांत किशोर ने तेजस्वी और मंगल पांडेय दोनों पर उठाए सवाल
जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने भी डस्टबिन खरीद को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि 500 से 1,000 रुपये कीमत वाला डस्टबिन करीब 15 हजार रुपये में खरीदा गया है तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि जिस विभाग में खरीद हुई, उससे जुड़े मंत्री और संबंधित अधिकारी जवाबदेह होने चाहिए।
प्रशांत किशोर ने कहा कि खरीद प्रक्रिया शुरू होने के समय तेजस्वी यादव स्वास्थ्य मंत्री थे, जबकि इसे अंतिम रूप दिए जाने के दौरान मंगल पांडेय स्वास्थ्य मंत्री थे। उन्होंने दोनों कार्यकालों की जांच की मांग की।
तेजस्वी यादव का पलटवार- गड़बड़ी हुई तो जिम्मेदारी तय हो
मामले में नाम आने के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रशांत किशोर के बयान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यदि खरीद में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।
तेजस्वी यादव ने कहा, “अगर मैंने घोटाला किया है तो मुझे जेल में डालो।” उन्होंने प्रशांत किशोर से मंगल पांडेय के साथ उनके संबंधों को लेकर भी सवाल किया।
स्वास्थ्य मंत्री ने जांच के दिए आदेश
लगातार उठ रहे सवालों के बीच बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने डस्टबिन खरीद में कथित अनियमितता की जांच के आदेश दिए हैं। बेगूसराय से मिली लिखित शिकायत के आधार पर स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव को पूरे मामले की जांच करने को कहा गया है।
इस मामले में स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग भी सामने आई है। सरकारी स्तर पर जांच के आदेश के बाद अब खरीद प्रक्रिया, टेंडर, तकनीकी मानकों और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अब टेंडर और भुगतान के दस्तावेजों पर नजर
पूरे विवाद में अब सबसे अहम सवाल यह है कि डस्टबिन की कीमत तय करने का आधार क्या था, उसका तकनीकी स्पेसिफिकेशन क्या था, कितनी संख्या में डस्टबिन खरीदे गए और वास्तविक भुगतान कितना हुआ।
इसके अलावा टेंडर प्रक्रिया में किन अधिकारियों और एजेंसियों की भूमिका थी, किस स्तर पर स्वीकृति दी गई और सरकारी अस्पतालों तक कितना सामान पहुंचा—इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे। फिलहाल मामले में लगाए गए घोटाले के आरोपों की आधिकारिक जांच जारी है।






