ईवीएम नहीं, भाजपा कार्यकर्ताओं के खून-पसीने से सींचा गया है बंगाल का कमल : बाबूलाल

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—बंगाल में भाजपा की सफलता को बताया कार्यकर्ताओं के संघर्ष और बलिदान का परिणाम

रांची, 08 मई । झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राजनीतिक सफलता को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा की जीत किसी चुनाव आयोग की मेहरबानी या ईवीएम की वजह से नहीं, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं के संघर्ष, खून-पसीने और बलिदान का परिणाम है।

सोशल मीडिया पोस्ट में विपक्ष पर निशाना

मरांडी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा पोस्ट में कहा कि कुछ लोग अब भी यह मानते हैं कि बंगाल में भाजपा को मिली सफलता चुनाव आयोग का “गिफ्ट” है। उन्होंने कहा कि जो लोग ईवीएम, केंद्रीय बल या दिल्ली के हस्तक्षेप को भाजपा की सफलता का कारण बताते हैं, वे बंगाल की वास्तविक राजनीतिक परिस्थितियों और कार्यकर्ताओं के संघर्ष को नहीं समझते।

उन्होंने लिखा, “बंगाल में कमल, बैलेट बॉक्स से पहले कार्यकर्ताओं के खून से खिला है।”

‘भाजपा का सफर महायज्ञ जैसा रहा’

अपने पोस्ट में मरांडी ने कहा कि वर्ष 2011 से 2025 तक बंगाल में भाजपा का सफर किसी सामान्य राजनीतिक यात्रा जैसा नहीं, बल्कि एक “महायज्ञ” रहा, जिसमें कार्यकर्ताओं ने अपने प्राणों की आहुति दी।

उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र की बात करने वालों को पेड़ों से लटकाया गया, बम से उड़ाया गया और कई कार्यकर्ताओं के शव क्षत-विक्षत हालत में मिले। उन्होंने नंदीग्राम, बीरभूम, कूचबिहार और बशीरहाट का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा को वोट देने के कारण गांवों को जलाया गया और लोगों को प्रताड़ित किया गया।

‘कार्यकर्ताओं का साहस ही भाजपा की ताकत’

मरांडी ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया, वे भी संघर्ष से पीछे नहीं हटे। उन्होंने दावा किया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने वर्षों तक दमन, हिंसा, फर्जी मुकदमे, जेल और सामाजिक बहिष्कार का सामना किया, लेकिन उनका मनोबल नहीं टूटा।

उन्होंने कहा कि यह साहस न ईवीएम देती है और न चुनाव आयोग, बल्कि यह विचारधारा और स्वाभिमान से पैदा होता है।

बंगाल में भाजपा के विस्तार का किया जिक्र

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बंगाल में भाजपा का विस्तार केवल राजनीतिक आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के संघर्ष और बलिदान का इतिहास है। उन्होंने बताया कि 2011 में भाजपा का केवल एक विधायक था, 2016 में तीन विधायक चुने गए, 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 18 सीटें जीतीं और 2021 विधानसभा चुनाव में 77 विधायक जीतकर मुख्य विपक्षी दल बनी।

मरांडी ने दावा किया कि 2026 में भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ ऐतिहासिक जीत हासिल की।

‘भाजपा की सफलता को कमतर आंकना शहीद कार्यकर्ताओं का अपमान’

अपने पोस्ट के अंत में मरांडी ने कहा कि जो लोग भाजपा की सफलता को “चुनाव आयोग की सेटिंग” बताते हैं, वे उन कार्यकर्ताओं और परिवारों का अपमान कर रहे हैं जिन्होंने राजनीतिक संघर्ष में अपने प्रियजनों को खोया है।

उन्होंने लिखा, “बंगाल में सत्ता किसी मशीन ने नहीं दी है। यहां हर वोट के पीछे एक शहादत छिपी है।”

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