हरित बंदरगाहों को बढ़ावा: केंद्र का बड़ा कदम, 2030 तक 30% कार्बन उत्सर्जन घटाने का लक्ष्य

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश के समुद्री ढांचे को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। हरित बंदरगाह (ग्रीन पोर्ट) और आधुनिक समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को तेज करते हुए वर्ष 2030 तक कार्बन उत्सर्जन में 30 प्रतिशत कमी का लक्ष्य तय किया गया है।

केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि प्रमुख बंदरगाहों पर ग्रीन टग ट्रांजिशन प्रोग्राम (GTTP) लागू किया गया है। इसके तहत पारंपरिक डीजल चालित टग्स को इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड टग्स में बदला जा रहा है।

हरित तकनीक की ओर बढ़ते बंदरगाह

सरकार द्वारा बंदरगाहों पर नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग, उपकरणों और वाहनों के विद्युतीकरण, शून्य-उत्सर्जन ट्रकों की तैनाती और ऑनशोर पावर सप्लाई सिस्टम जैसे कदम उठाए गए हैं। इन प्रयासों से प्रमुख बंदरगाहों पर कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

प्रमुख बंदरगाहों में नई पहल

सरकार ने दीन दयाल उपाध्याय बंदरगाह, जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह, विशाखापत्तनम बंदरगाह और वीओ चिदंबरनार बंदरगाह के लिए इलेक्ट्रिक टग्स के कार्यादेश जारी किए हैं।

वहीं, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने दीनदयाल पोर्ट (गुजरात), पारादीप पोर्ट और वीओ चिदंबरनार पोर्ट को ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

ग्रीन हाइड्रोजन और अमोनिया पर फोकस

इन बंदरगाहों पर ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन, इलेक्ट्रोलाइज़र आधारित संयंत्रों की स्थापना और ग्रीन मेथनॉल बंकरिंग सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।

पारादीप पोर्ट पर पीपीपी मॉडल के तहत 797.17 करोड़ रुपये की लागत से ग्रीन हाइड्रोजन/अमोनिया हैंडलिंग जेटी का निर्माण भी किया जा रहा है।

180 परियोजनाओं को मिली मंजूरी

सरकार ने बताया कि पिछले दो वर्षों (2023-24 और 2024-25) में बंदरगाहों के आधुनिकीकरण, तटीय शिपिंग और ग्रीन पोर्ट विकास से जुड़ी करीब 180 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

‘मैरिटाइम इंडिया विजन 2030’ का लक्ष्य

मैरिटाइम इंडिया विजन 2030 के तहत सरकार ने कई बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं—

  • बंदरगाहों पर 60% से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग
  • 50% उपकरणों का विद्युतीकरण
  • 20% हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर)
  • प्रति टन कार्गो पर 30% कार्बन उत्सर्जन में कमी

इन पहलों से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत के समुद्री क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बनाने में भी मदद मिलेगी।

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