—सीवान के आलमापुर में पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में मृतकों की संख्या छह हुई, ध्वस्त मकान की रसोई से मिला लापता युवती का शव
सीवान, 27 अक्टूबर । बिहार के सीवान जिले के जामो थाना क्षेत्र के आलमापुर गांव में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के तीसरे दिन मंगलवार को लापता मुस्कान सिद्दीकी का शव बरामद किया गया। ध्वस्त मकान की रसोई से शव मिलने के साथ ही परिजनों की आखिरी उम्मीद टूट गई। विस्फोट के बाद से मुस्कान की तलाश की जा रही थी। इस बरामदगी के बाद हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। घटना ने जहां कई परिवारों को गहरे दुख में डुबो दिया है, वहीं राहत एवं बचाव अभियान की प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं।
तीन दिन बाद रसोई से मिला मुस्कान का शव
स्वर्गीय आजाद अहमद की पुत्री मुस्कान सिद्दीकी विस्फोट के बाद से लापता थी। मकान के ध्वस्त होने के बाद से ही परिजन उसकी सलामती की उम्मीद लगाए बैठे थे। मंगलवार को रेस्क्यू अभियान के दौरान उसका शव मलबे में दबे मकान की रसोई से बरामद हुआ।
शव मिलने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि जिस मकान में लगातार राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा था, वहां रसोई में दबे शव का पता पहले क्यों नहीं चल सका। क्या मलबे के सभी हिस्सों की व्यवस्थित तरीके से तलाशी ली गई थी? क्या रसोई वाले हिस्से की समय रहते जांच हुई थी? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
हादसे में छह लोगों की मौत, कई परिवारों में मातम
आलमापुर में हुए इस भीषण विस्फोट में अब तक छह लोगों की जान जा चुकी है। मृतकों की पहचान अमरुद्दीन अहमद, इशरत सिद्दीकी, खुशबू सिद्दीकी, अरशद सिद्दीकी, राजकुमार सिंह उर्फ भोला और मुस्कान सिद्दीकी के रूप में हुई है।
राजकुमार सिंह उर्फ भोला बड़हरिया थाना क्षेत्र के सदरपुर गांव के निवासी थे। इस हादसे ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है। जिस इलाके में खुशियों और शादी की तैयारियों का माहौल होना था, वहां अब मातम पसरा हुआ है।
रेस्क्यू अभियान की कार्यशैली पर उठे सवाल
मुस्कान का शव तीसरे दिन मिलने के बाद राहत एवं बचाव अभियान में अपनाई गई प्रक्रिया की समीक्षा की मांग उठ रही है। सवाल यह है कि मलबे की तलाशी किस तरीके से की गई और क्या ध्वस्त मकान के प्रत्येक हिस्से की जांच सुनिश्चित की गई थी।
हालांकि, शव देर से मिलने मात्र से किसी अधिकारी या बचाव दल की लापरवाही साबित नहीं होती। मलबे की स्थिति, तलाशी की परिस्थितियों और अभियान के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच के बाद ही किसी चूक के बारे में निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
रिहायशी इलाके में पटाखा निर्माण पर भी सवाल
इस घटना ने रिहायशी इलाके में पटाखा निर्माण और भंडारण की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच के दायरे में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि पटाखों का निर्माण और भंडारण किन परिस्थितियों में किया जा रहा था तथा संबंधित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा था या नहीं।

इसके साथ ही संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था और विस्फोट के बाद राहत एवं बचाव अभियान के संचालन की भी समीक्षा आवश्यक है।
हादसे के कारणों और बचाव अभियान की हो पारदर्शी जांच
आलमापुर की घटना में छह लोगों की मौत के बाद हादसे के कारणों का पता लगाना और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना जरूरी है। प्रशासन को पटाखों के निर्माण एवं भंडारण की परिस्थितियों, सुरक्षा इंतजामों और रेस्क्यू अभियान में अपनाई गई प्रक्रिया की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।
मुस्कान का शव तीन दिन बाद क्यों मिला, मलबे की तलाशी में कोई हिस्सा छूट तो नहीं गया था और यदि प्रक्रिया में कोई चूक हुई तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है—इन सवालों के जवाब सामने आने चाहिए। इससे पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने में मदद मिल सकती है।






