वीरपुर मर्डर केस में तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई

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सुपौल। जिले में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत सिंह की अदालत ने गुरुवार को वीरपुर थाना क्षेत्र से जुड़े बहुचर्चित हत्याकांड में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने तीन अभियुक्तों को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जबकि कुल 13 आरोपियों में से नौ को पूर्व में बाइज्जत बरी कर दिया गया था।

अदालत ने जगदीश करोजिया, मनीष कुमार यादव एवं कुंदन कुमार गोईत को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास एवं 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा नहीं करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

इसके अलावा तीनों दोषियों को भादवि की धारा 307/34 के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई। जुर्माना नहीं देने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान रखा गया है। वहीं आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत जगदीश करोजिया एवं मनीष कुमार यादव को चार वर्ष का कारावास एवं पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना नहीं देने पर एक माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

गौरतलब है कि 7 मई 2020 की रात वीरपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बाढ़ आश्रय टिहली भवन के समीप घात लगाकर अपराधियों ने गोलीबारी की थी। इस घटना में पूर्व पैक्स अध्यक्ष गणेश यादव एवं उनके भांजे प्रदीप यादव को गोली लगी थी। दोनों कोशिकापुर रामजानकी चौक स्थित अपनी दुकान बंद कर बाइक से घर लौट रहे थे। गोली लगने से प्रदीप यादव की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि गणेश यादव गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई थी। घायल गणेश यादव की पत्नी परिता देवी के आवेदन पर वीरपुर थाना कांड संख्या 85/20 दर्ज किया गया, जिसमें कुल 13 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया था।

इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक अमर कुमार ने पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विनोद कांत झा, राज कुमार सिंह, तेज नारायण गुप्ता एवं संजय कुमार सिंह ने बहस में भाग लिया। अभियोजन पक्ष ने कुल 26 गवाह प्रस्तुत किए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से तीन गवाह पेश किए गए।

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