रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दावोस में हो रहे विश्व आर्थिक फोरम में शामिल होने के लिए गुरुवार को ज्यूरिख पहुंचे। वहां एयरपोर्ट पर भारतीय राजदूत मृदुल कुमार ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का स्वागत किया।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट एक्स में लिखा है कि राजदूत मृदुल कुमार से मिलकर अत्यंत प्रसन्नता हुई। मैं प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए समावेशी विकास पर केंद्रित बैठक में झारखंड और भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए उत्सुक हूं। खनिज संपदा से भरपूर झारखंड राज्य खनन, विनिर्माण, अवसंरचना और हरित ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश के व्यापक अवसर प्रदान करता है।
उल्लेखनीय है कि दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक होगी। इसका उद्देश्य निवेश की संभावनाओं से लबरेज झारखंड को एक प्रमुख निवेश का गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करना है। वैश्विक उद्योग जगत के शीर्ष लोगों के साथ संवाद स्थापित करना है। राज्य के फोकस एरिया में निवेश के नए अवसरों को आगे बढ़ाना है। इस दौरान बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ निवेश के प्रस्तावों पर चर्चा होगी।
सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर बताया गया है कि सरकार का उद्देश्य इस मंच के जरिए झारखंड को “इंफिनिट ऑपर्च्युनिटी स्टेट” के रूप में स्थापित करना है। दावोस प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री सोरेन वैश्विक उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों और निवेशकों से संवाद करेंगे। इस दौरान खनिज आधारित उद्योग, औद्योगिक ढांचा, ऊर्जा संक्रमण, सतत विकास, पर्यटन और सामाजिक समावेशन जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में निवेश के नए अवसरों पर चर्चा की जाएगी। विभिन्न बैठकों और सत्रों में संभावित निवेश प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श किया जाना है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के बाद झारखंड सरकार का प्रतिनिधिमंडल यूनाइटेड किंगडम के लंदन और ऑक्सफोर्ड का भी दौरा करेगा। वहां निवेश, नीति सहयोग, शैक्षणिक संस्थानों से संवाद और प्रवासी भारतीय समुदाय से बातचीत के कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इस क्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के ब्लावाटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में एक विशेष व्याख्यान और संवाद सत्र को संबोधित करेंगे, जो किसी भारतीय मुख्यमंत्री के लिए पहली बार होगा। राज्य सरकार का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय दौरा झारखंड के लिए निवेश आकर्षित करने, औद्योगिक गतिविधियों को गति देने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल 25 जनवरी को झारखंड लौटेगा।





