लोकसभा में पेश हुआ केंद्रीय बजट: वित्त मंत्री सीतारमण ने रखा आर्थिक खाका; किसानों, युवाओं, महिलाओं और मध्यम वर्ग पर फोकस

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नई दिल्‍ली। केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश किया। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रविवार को वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट को अंपनी मंजूरी दी।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, सरकार ‘विकसित भारत’ की दिशा में मजबूत कदम उठाना जारी रखेगा। भारत वैश्विक बाजार के साथ गहनता से जुड़ा रहेगा। मैं पार्ट-ए की शुरुआत करते हुए इस देश के नागरिकों का आभार प्रकट करना चाहूंगा, जिन्होंने इस देश को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाया है।

सीतारमण ने कहा कि हमने सुनिश्चित किया है कि किसानों, अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों, युवाओं, महिलाओं, गरीबों को लाभ मिलता रहे। यह युवा शक्ति से प्रेरित बजट है। हमारी सरकार का संकल्प गरीब, हाशिए पर पड़े लोगों पर ध्यान देना है।

वित्तमंत्री सीतारमण ने बजट भाषण में गिनाए ‘तीन कर्तव्य’

उन्‍होंने कहा कि कर्तव्य भवन में यह बजट बना है। पहला कर्तव्य है- आर्थिक विकास को सतत तरीके से बढ़ाना। दूसरा कर्तव्य है- जनआकांक्षाओं को पूरा करना। तीसरा कर्तव्य है- सबका साथ, सबका विकास। यह सुनिश्चित करना कि सभी को संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों तक समान रूप से पहुंच मिले।

इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में अपना रिकॉर्ड नौवां बजट पेश करने से पहले रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। परंपरा के अनुसार वित्त मंत्री संसद जाने से पहले राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति से मिलीं। राष्ट्रपति मुर्मु ने वित्त मंत्री सीतारमण को दही-चीनी खिलाई। उन्होंने बजट के लिए वित्त मंत्री को शुभकामनाएं दी।

देश की आर्थिक स्थिरता, वित्तीय अनुशासन, लगातार विकास और कम महंगाई से पहचानः सीतारमण

वित्तमंत्री ने कहा कि बजट का पहला कर्तव्य आर्थिक विकास को तेज और टिकाऊ बनाना है। इसके तहत प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और वैश्विक अस्थिरताओं के बीच अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास को गति देने और उसे बनाए रखने के लिए छह क्षेत्रों में हस्तक्षेप प्रस्तावित हैं। इनमें रणनीतिक क्षेत्रों में विनिर्माण को बढ़ाना,औद्योगिक क्षेत्रों को पुनर्जीवित करना, अग्रणी लघु एवं मध्यम उद्यमों का निर्माण करना, बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना, दीर्घकालिक सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना और शहरी आर्थिक क्षेत्रों का विकास करना शामिल है।

उन्होंने कहा कि दूसरा कर्तव्य देशवासियों की आकांक्षाओं को पूरा करने से जुड़ा है। वित्तमंत्री ने कहा कि सरकार लोगों की क्षमताओं को सशक्त बनाकर उन्हें भारत की समृद्धि की यात्रा में सक्रिय भागीदार बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। वित्तमंत्री ने कहा कि बजट का तीसरा कर्तव्य ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विज़न पर आधारित है। इसके तहत हर परिवार, समुदाय और क्षेत्र को संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि सभी को राष्ट्र निर्माण में सार्थक भागीदारी मिल सके।

सीतारमण ने कहा कि सरकार ने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, एनर्जी सिक्योरिटी बनाई है, और जरूरी इनपुट पर निर्भरता कम की है, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया है कि रोजगार पैदा करने, कृषि उत्पादकता और घरों की खरीदने की शक्ति को सपोर्ट करने वाले सुधारों के ज़रिए सरकार के हर काम से नागरिकों को फायदा हो। वित्त मंत्री ने कहा कि बजट 2026-27 समावेशी विकास, आर्थिक मजबूती और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित है।

सीतारमण ने कहा, “आत्मनिर्भरता को अपना मार्गदर्शक मानते हुए, हमने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, ऊर्जा सुरक्षा बनाई है और जरूरी आयात पर निर्भरता कम की है। इसके साथ ही हमने यह भी सुनिश्चित किया है कि सरकार के हर काम से नागरिकों को फायदा हो। रोज़गार पैदा करने, कृषि उत्पादकता, परिवारों की खरीदने की शक्ति और लोगों को यूनिवर्सल सर्विस देने के लिए सुधार किए गए हैं। इन उपायों से लगभग 7 फीसदी की हाई ग्रोथ रेट मिली है और हमें गरीबी कम करने और हमारे लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में काफी मदद मिली है।”

सीतारमण ने कहा, “आर्थिक विकास को तेज़ करने और बनाए रखने के लिए मैं छह क्षेत्रों में सुधार करने का प्रस्ताव करती हूं, सात रणनीतिक क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाना; पुराने औद्योगिक क्षेत्रों को फिर से पुनर्जीवित करना; चैंपियन एमएसएमई बनाना; इंफ्रा को बढ़ावा देना; लंबी अवधि की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना; शहरी आर्थिक क्षेत्रों का विकास करना।”

वित्तमंत्री ने कहा, “आज हम एक ऐसे बाहरी माहौल का सामना कर रहे हैं जिसमें व्यापार और बहुपक्षवाद खतरे में हैं और संसाधनों और सप्लाई चेन तक पहुंच बाधित है। नई टेक्नोलॉजी प्रोडक्शन सिस्टम को बदल रही हैं, जबकि पानी, ऊर्जा और ज़रूरी खनिजों की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। भारत विकसित भारत की ओर आत्मविश्वास से कदम बढ़ाता रहेगा, जिसमें महत्वाकांक्षा और समावेश को संतुलित किया जाएगा। बढ़ती अर्थव्यवस्था और बढ़ते व्यापार और पूंजी की ज़रूरतों के साथ, भारत को वैश्विक बाजारों के साथ गहराई से जुड़ा रहना चाहिए, ज़्यादा निर्यात करना चाहिए और स्थिर लंबे समय के निवेश को आकर्षित करना चाहिए।”

वित्त मंत्री ने कहा, “…हम इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 लॉन्च करेंगे और टेक्नोलॉजी और स्किल्ड वर्कफोर्स डेवलप करने के लिए इंडस्ट्री-लेड रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर्स पर भी फोकस करेंगे।”

वित्त मंत्री सीतारमण ने लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश किया। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में मंत्रिमंडल ने रविवार को वित्त वर्ष 2026-27 के बजट को मंजूरी दी।

मधुमेह‑कैंसर जैसी बीमारियों की रोकथाम पर विशेष ध्यान

देश में बढ़ती मधुमेह, कैंसर, हृदय, किडनी और लिवर से जुड़ी बीमारियों जैसे- गैर संक्रामक रोगों को देखते हुए सरकार अगले 5 सालों में फार्मा और बायो‑टेक सेक्टर के विकास में 10 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। इन बीमारियों की रोकथाम के लिए सरकार जांच और शुरुआती इलाज पर विशेष ध्यान देगी ताकि लोगों को इन बीमारियों से बचाने की क्षमता को मजबूत किया जा सके।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में अपने बजट भाषण में कहा कि देश में रोग‑भार लगातार बढ़ रहा है और अब यह ज्यादातर गैर‑संक्रामक रोग यानी डायबिटीज, कैंसर, हृदय संबंधी बीमारी, किडनी और लिवर से जुड़ी बीमारियों की तरफ झुक रहा है। इसी वजह से सरकार का पूरा ध्यान रोकथाम, जांच और शुरुआती इलाज पर रहेगा ताकि लोगों को इन बीमारियों से बचाने की क्षमता मजबूत हो सके।

वित्त मंत्री कहा कि अगले पांच साल में 10 हजार करोड़ रुपये बायो‑फार्मा सेक्टर के विकास पर खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार, टीका निर्माण और उन्नत उपचार पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। साथ ही औषधीय शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए तीन नए राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान(एनपीईआरएस) स्थापित किए जाएंगे, जिनसे गुणवत्तापूर्ण कौशल विकास, अत्याधुनिक लैब सुविधाएं और वैश्विक प्रतिभा तैयार करने में मदद मिलेगी।

सीतारमण ने कहा कि लगातार सुधारों और नीतियों के चलते देश ने 7 प्रतिशत की उच्च विकास दर हासिल की है। भारत अब विकसित भारत की दिशा में आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहा है और यह यात्रा लगातार जारी रहेगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता को मार्गदर्शक सिद्धांत मानते हुए सरकार ने घरेलू विनिर्माण क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई है। रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता, घरेलू क्रय शक्ति और सार्वभौमिक सेवाओं को बढ़ाने के लिए सुधार किए गए हैं। इन उपायों से गरीबी कम करने और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने में अहम प्रगति हुई है।

केंद्रीय बजट में 10 हजार करोड़ रुपये का एमएसएमई ग्रोथ फंड बनाने का प्रस्ताव

सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा कि 2025 में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के लिए एक योजना शुरू की गई थी। अब ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों को समर्पित रेयर-अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने में मदद करने का प्रस्ताव रखा गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि हम 5 लाख से ज्‍यादा आबादी वाले शहरों, यानी टियर-2 और टियर-3 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास जारी रखेंगे।

सीतारमण ने कहा कि हाई-वैल्यू, टेक्नोलॉजी-एडवांस्ड सीआईई की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के लिए कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट को बेहतर बनाने की एक योजना शुरू की जाएगी। इसमें आग बुझाने के उपकरण से लेकर लिफ्ट और टनल बोरिंग मशीन तक शामिल हो सकते हैं। इसके साथ ही मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। खादी और हथकरघा को मजबूत करने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल शुरू करने का भी बजट में प्रस्ताव रखा गया है।

सीतारमण ने पर्यावरण के लिहाज़ से टिकाऊ कार्गो मूवमेंट को बढ़ावा देने के लिए पूर्व में डंकुनी को पश्चिम में सूरत से जोड़ने वाले नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि अगले 5 सालों में 20 नए जलमार्ग चालू किए जाएंगे, जिसकी शुरुआत ओडिशा में नेशनल वॉटरवे 5 से होगी, जो तालचेर और अंगुल के खनिज-समृद्ध इलाकों और कलिंगनगर जैसे औद्योगिक केंद्रों को पारादीप और धमरा बंदरगाहों से जोड़ेगा। वाराणसी और पटना में भी अंतर्देशीय जलमार्गों के लिए एक शिप रिपेयर इकोसिस्टम स्थापित किया जाएगा।

केंद्रीय बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार क्षेत्र के लिए हुईं कई महत्वपूर्ण घोषणाएं

अपने बजट भाषण में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि शिक्षा से रोजगार और उद्यम पर फोकस किया जाएगा। विकसित भारत का कोर ड्राइवर सेवा क्षेत्र रहेगा। इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई जाएगी। यह कृतिम बौद्धिकता (एआई) समेत प्रौद्योगिकियों से पड़ने वाले असर का आकलन करेगी।

वित्त मंत्री ने कहा दक्षता आधारित रोजगार पर ध्यान दिया जाएगा। स्वास्थ्य पेशेवर बनाने वाले संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। रेडियोलॉजी, एनेस्थीशिया जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। अगले पांच वर्ष में एक लाख एएचपी जोड़े जाएंगे। 1.5 लाख केयर गिवर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा। सीतारमण ने कहा कि मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब बनाए जाएंगे। इसमें निजी क्षेत्र की सहभागिता रहेगी। हेल्थकेयर कॉम्प्लेक्स बनेंगे। इनमें आयुष केंद्र होंगे। डायग्नोस्टिक, पोस्टर केयर और रीहैब के केंद्र रहेंगे। इससे स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

उन्होंने कहा कि दुनियाभर में सम्मान हासिल कर चुकी प्राचीन योग पद्धति और आयुर्वेद पर जोर दिया जाएगा। तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान बनाए जाएंगे। वित्तमंत्री ने कहा कि गेमिंग, कॉमिक जैसे सेक्टर में 2030 तक 20 लाख पेशेवरों की जरूरत है। पूर्वी भारत में नए राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान की स्थापना होगी। वित्त मंत्री ने कहा कि पांच विश्वविद्यालय टाउनशिप की बड़े औद्योगिक और लॉजिस्टिक गलियारों के पास स्थापना होगी। हर जिले में एक महिला छात्रावास बनेगा। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी की स्थापना होगी। 20 प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर 10 हजार गाइड के कौशल बढ़ाने की योजना शुरू होगी। नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड स्थापित होगी।

देश में 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे : सीतारमण

 निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए देश में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ये कॉरिडोर शहरों के बीच ‘ग्रोथ कनेक्टर’ के रूप में कार्य करेंगे और पर्यावरण के लिहाज़ से टिकाऊ यात्री परिवहन प्रणाली को बढ़ावा देंगे।

प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–बेंगलुरु, हैदराबाद–चेन्नई, चेन्नई–बेंगलुरु, दिल्ली–वाराणसी तथा वाराणसी–सिलीगुड़ी को जोड़ेंगे। इन परियोजनाओं के माध्यम से विभिन्न राज्यों और प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों के बीच संपर्क सुदृढ़ किया जाएगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार वाहन क्षमता बढ़ाने और आधुनिक रेल अवसंरचना के विकास पर विशेष जोर दे रही है। इन हाई-स्पीड कॉरिडोरों से औद्योगिक, तकनीकी, सांस्कृतिक और धार्मिक क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

केंद्रीय बजट में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये का प्रस्ताव

तारमण ने अपने बजट भाषण में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि पर्यावरण के लिहाज़ से टिकाऊ पैसेंजर सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए शहरों के बीच ग्रोथ कनेक्टर के तौर पर 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाए जायेंगे, जिसमें मुंबई से पुणे, पुणे से हैदराबाद, हैदराबाद से बेंगलुरु, हैदराबाद से चेन्नई, चेन्नई से बेंगलुरु, दिल्ली से वाराणसी, वाराणसी से सिलीगुड़ी शमिल है। उन्होंने भारत को मेडिकल टूरिज्म हब के तौर पर बढ़ावा देने के लिए राज्यों को देश में 5 रीजनल हब स्थापित करने में मदद करने के लिए एक योजना का प्रस्ताव रखा है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट में नारियल उत्पादन में प्रतिस्पर्धा को और बढ़ाने के लिए नारियल संवर्धन योजना का प्रस्ताव रखा है, ताकि अलग-अलग तरीकों से उत्पादन बढ़ाया जा सके और उत्पादकता बेहतर हो सके। इसमें मुख्य नारियल उगाने वाले राज्यों में बेकार पेड़ों की जगह नई किस्म के पौधे लगाना शामिल है। साथ ही भारतीय काजू और कोको के लिए एक खास प्रोग्राम का प्रस्ताव है, ताकि भारत कच्चे काजू और नारियल के उत्पादन और प्रोसेसिंग में आत्मनिर्भर बन सके, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़े और 2030 तक भारतीय काजू और भारतीय कोको को प्रीमियम ग्लोबल ब्रांड में बदला जा सके।

वर्ष 2047 तक जीडीपी में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 10 फीसदी करने का लक्ष्य

केंद्र सरकार ने वर्ष 2047 तक देश की जीडीपी में सेवा क्षेत्र का योगदान 10 फीसदी करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए इस क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। साथ ही निजी क्षेत्र के सहयोग से पांच क्षेत्रीय चिकित्सीय केंद्र बनाए जाएंगे, जिनमें आयुष केंद्र, चिकित्सीय पर्यटन और निदान क्षेत्र शामिल होंगे। इनसे डॉक्टर, नर्स और अन्य चिकित्सीय कर्मियों को रोजगार मिलेगा।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में अपने बजट भाषण में कहा कि ‘शिक्षा से रोजगार और उद्यमिता’ नाम की एक उच्चस्तरीय स्थायी समिति बनाई जाएगी, जो सेवा क्षेत्र को ‘विकसित भारत’ का मुख्य प्रेरक बनाने के लिए आवश्यक उपायों की सिफारिश करेगी। यह समिति वृद्धि, रोजगार और निर्यात की संभावनाओं को अधिकतम करने वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देगी और उभरती तकनीकों, खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का नौकरियों और कौशल पर प्रभाव आंकेगी।

उन्होंने कहा कि कोविड के बाद योग और आयुर्वेद को काफी बढ़ावा मिला है। वैश्विक मांग को देखते हुए आयुर्वेद पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत तीन नए अखिल भारतीय संस्थान बनाए जाएंगे, आयुष फार्मेसी और औषध परीक्षण प्रयोगशाला को उन्नत किया जाएगा और जामनगर स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन वैश्विक चिकित्सीय केंद्र को भी उन्नत किया जाएगा।

सीतारमण ने कहा कि कार्बन पकड़ने, उपयोग करने और भंडारण (सीसीयूएस) तकनीकों के लिए अगले पांच वर्षों में 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाएगा। बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सरकार ने जलमार्ग पर बड़ा फोकस किया है। अगले पांच साल में 20 नए जलमार्ग बनाए जाएंगे। ओडिशा में राष्ट्रीय जलमार्ग बनाया जाएगा ताकि खनिज संपन्न तालचेर और अंगूल को कनेक्ट किया जा सके और कलिंगनगर को पारादीप पोर्ट से जोड़ा जा सके। साथ ही देश में जहाज मरम्मत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने के लिए वाराणसी व पटना में विशेष सेंटर स्थापित किए जाएंगे।

एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने के लिए वित्त मंत्री ने 10 हजार करोड़ रुपये का एमएसएमई ग्रोथ फंड घोषित किया। टेक्सटाइल क्षेत्र को भी बूस्टर मिलेगा और पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में सरकार बुनियादी ढांचा को मजबूत करेगी।

देश में खोले जायेंगे 3 नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी अहम घोषणाएं की हैं। जिसके तहत देश में 3 नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान खोले जाएंगे। अभी इनकी जगह नहीं बताई गई है। इसके साथ बेहतर मानसिक स्वास्थ्य इलाज के उद्देश्य से वित्त मंत्री ने निमहंस 2.0 स्थापना की घोषणा की जो देश के लिए प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के तौर पर काम करेगा। इसके साथ ही उत्तर भारत में दो मानसिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने की घोषणा की गई। निर्मला सीतारमण ने भारत को मेडिकल टूरिज्म हब के तौर पर बढ़ावा देने के लिए देश में 5 रीजनल हब स्थापित करने में मदद की योजना का प्रस्ताव रखा।

इससे मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ेगी, प्रशिक्षण और शोध को मजबूती मिलेगी और मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल उपलब्ध कराई जा सकेगी। इसके अलावा 5 साल में एक लाख विशेषज्ञ हेल्थकेयर प्रोफेशनल बनेंगे। 1.5 लाख केयर गिवर्स को प्रशिक्षण दिया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नॉन कॉम्यूनिकेबल डिजिज की दवाइयों की कीमत सस्ती की जाएगी। इसमें कैंसर की दवाओं पर जोर दिया गया है।

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने केंद्रीय बजट में देशभर में तीन नए एआईआईए स्थान खोले जाने की घोषणा को लेकर कहा कि यह गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक शिक्षा, अनुसंधान और रोगी देखभाल को सशक्त बनाएगा।

करदाताओं को राहत, टीसीएस दर घटी, रिटर्न संशोधन के लिए दिया गया अतिरिक्त समय

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में आम लोगों से जुड़े कई बड़े ऐलान किए। आम करदाताओं को राहत देने के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य पर लगने वाले स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) घटाकर 5 प्रतिशत से 2 प्रतिशत कर दिया गया है। आयकर रिटर्न संशोधित करने के लिए अब अतिरिक्त समय मिलेगा। आईटीआर‑1 और आईटीआर‑2 दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई तय की गई है, जबकि गैर‑लेखा परीक्षण व्यापार मामलों और न्यासों के लिए अंतिम तिथि 31 अगस्त होगी। संपत्ति बेचने वाले एनआरआई पर टीडीएस नियम भी बदले गए हैं। अब कटौती निवासी खरीदार करेगा और इसके लिए टैक्स अकाउंट नंबर की आवश्यकता नहीं होगी।

कर व्यवस्था में बदलाव

• शिक्षा और स्वास्थ्य पर स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) दर घटाकर 5 प्रतिशत से 2 प्रतिशत की गई।

• आयकर रिटर्न संशोधन के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा, नाममात्र शुल्क देकर संशोधित रिटर्न दाखिल किए जा सकेंगे।

• आईटीआर‑1 और आईटीआर‑2 दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई होगी।

• गैर‑लेखा परीक्षण व्यापार मामलों और न्यासों के लिए अंतिम तिथि 31 अगस्त तय की गई।

• संपत्ति बेचने वाले अनिवासी भारतीयों पर टीडीएस नियम बदला गया। अब कटौती निवासी खरीदार करेगा और इसके लिए टैक्स अकाउंट नंबर की आवश्यकता नहीं होगी।

• बजट 2026 में आयकर रिटर्न संशोधित करने की समयसीमा 31 दिसंबर की जगह अगले साल 31 मार्च तक बढ़ाई गई

स्वास्थ्य और आयुष क्षेत्र

भारत को चिकित्सीय पर्यटन केंद्र बनाने के लिए पांच क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किए जाएंगे। आयुष फार्मेसी और औषध परीक्षण प्रयोगशाला का उन्नयन होगा और जामनगर स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन वैश्विक चिकित्सीय केंद्र को भी उन्नत किया जाएगा।

एमएसएमई और वस्त्र क्षेत्र

एमएसएमई क्षेत्र को मज़बूत करने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का एमएसएमई विकास कोष घोषित किया गया। वस्त्र क्षेत्र को भी प्रोत्साहन मिलेगा और पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में बुनियादी ढांचे को मज़बूत किया जाएगा।

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