रामगढ़। रांची के धुर्वा इलाके से लापता अंश और अंशिका रामगढ़ जिले के रजरप्पा थाना क्षेत्र से बरामद कर लिए गए हैं। रामगढ़ एसपी अजय कुमार ने बारामदगी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि रजरप्पा थाना क्षेत्र के चितरपुर इलाके के जान्हे की पहाड़ी से दोनों बच्चे बरामद हुए हैं। इस बरामदगी में बजरंग दल के सदस्यों की भी अहम भूमिका रही है। एसपी ने बताया कि बच्चों को अगवा करने वाले गिरोह के सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया है। दोनों बच्चों को एसपी आवास लाया गया है, जहां उनसे बात की जा रही है। बारामदगी की सूचना मिलते ही रांची जिले के ग्रामीण एसपी और कई थाना प्रभारी रामगढ़ पहुंच चुके हैं।
सोनम और सूर्या के पास थे दोनों बच्चे
एसपी अजय कुमार ने बताया कि जान्हे पहाड़ी पर सोनम और सूर्या नामक दंपति के पास दोनों बच्चे मौजूद थे। स्थानीय नागरिकों को जब पता चला कि उनके पास दो बच्चे हैं तो उसके बारे में पूछताछ की। स्थानीय लोगों से पता चला कि उनकी हाल ही में शादी हुई है और कोई बच्चा पैदा नहीं हुआ। जब उनकी तस्वीर खींचकर परिजनों को भेजा गया तो बच्चों की पुष्टि हो गई।
भीख मांग कर गुजारा करते हैं सोनम और सूर्या
पुलिस के अनुसार सोनम और सूर्य मूल रूप से बिहार राज्य के औरंगाबाद जिले के रहने वाले हैं। रजरप्पा क्षेत्र में वह भीख मांग कर अपना गुजारा कर रहे थे। बच्चों के मिलने के बाद वे चितरपुर में ही एक कमरा किराया पर लेना चाहते थे।
दो लाख रुपये इनाम देने की थी घोषणा
रांची पुलिस ने 13 दिनों से लापता बच्चों की सूचना देने वाले को दो लाख रुपये इनाम देने की घोषणा भी की थी। इसके अलावा रांची पुलिस ने गंतव्य केयर फाउंडेशन नाम के एनजीओ के साथ मिलकर पोस्टर अभियान की भी शुरुआत की थी। वहीं दूसरी तरफ एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर पुलिस 5000 से अधिक मोबाइल नंबरों और लगभग 2000 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जांच कर रही थी।
उल्लेखनीय है कि रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र स्थित मौसीबाड़ी खटल से गत दो जनवरी की दोपहर दोनों भाई-बहन तीन बजे घर से कुछ सामान लेने के लिए बाहर निकले थे। लेकिन दोनों वापस नहीं लौटे थे। परिवार और स्थानीय लोगों ने बच्चों को ढूंढने की कोशिश की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद परिजनों ने धुर्वा थाने में दोनों बच्चों की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने पर रांची पुलिस ने बच्चों की तलाश शुरू की। लेकिन तीन-चार दिन तक अंश-अंशिका का पता नहीं चलने पर परिजन धुर्वा में धरने पर बैठे थे। इसके बाद रविवार को धुर्वा बंद भी किया गया था।





