बोधगया में दलाई लामा के 90वें जन्मदिवस पर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन, शांति और करुणा का वैश्विक संदेश

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Manoj Kumar

बोधगया: बिहार के बोधगया—जो गौतम बुद्ध की ज्ञानस्थली के रूप में विश्वभर में प्रसिद्ध है—में दलाई लामा के 90वें जन्मदिवस के अवसर पर भव्य अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति, सह-अस्तित्व और अहिंसा के संदेश को मजबूत करने का मंच भी बना।

अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और उद्देश्य

एशियन बुद्धिस्ट कॉन्फ्रेंस फॉर पीस द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में एशिया और अन्य क्षेत्रों के कुल 9 देशों—मंगोलिया, रूस, भारत, लाओस, वियतनाम, श्रीलंका, बांग्लादेश और जापान—के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इन प्रतिनिधियों में बौद्ध भिक्षु, विद्वान, नीति-निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे, जिन्होंने विभिन्न सत्रों में अपने विचार साझा किए।

सम्मेलन का मुख्य विषय ‘बोधिसत्व, ज्ञान और करुणा’ रखा गया, जो बौद्ध दर्शन के मूल सिद्धांतों को दर्शाता है। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि करुणा (Compassion) और प्रज्ञा (Wisdom) का संतुलन ही मानव समाज को स्थायी शांति की ओर ले जा सकता है।

विनय कुमार सक्सेना का संबोधन

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विनय कुमार सक्सेना ने अपने संबोधन में कहा कि आज जब दुनिया कई तरह के संघर्षों, युद्धों और वैचारिक टकरावों से गुजर रही है, तब दलाई लामा और बुद्ध के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि बौद्ध दर्शन केवल एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की ऐसी पद्धति है जो मानवता को जोड़ने का कार्य करती है।

वैश्विक तनाव और शांति का संदेश

सम्मेलन में मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, विशेषकर ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे समय में संवाद, सहिष्णुता और अहिंसा की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है।
वक्ताओं ने सुझाव दिया कि वैश्विक नेतृत्व को बौद्ध सिद्धांतों—मध्यम मार्ग (Middle Path), करुणा और अहिंसा—को अपनाकर संघर्षों का समाधान खोजने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

दलाई लामा की शिक्षाओं पर विशेष फोकस

दलाई लामा के 90वें जन्मदिवस को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हुए उनके जीवन और शिक्षाओं पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। वक्ताओं ने बताया कि दलाई लामा ने हमेशा “Universal Responsibility” यानी वैश्विक जिम्मेदारी की बात की है, जिसमें हर व्यक्ति को शांति और सद्भाव के लिए योगदान देना चाहिए।

सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयाम

सम्मेलन के दौरान पारंपरिक बौद्ध प्रार्थनाएं, ध्यान सत्र (Meditation Sessions) और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। इससे विभिन्न देशों की सांस्कृतिक विविधता और बौद्ध परंपराओं की झलक देखने को मिली।

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