बोकारो गुमशुदा युवती मामले में झारखंड हाई कोर्ट सख्त, एसपी को तलब कर मांगी जवाबदेही, जांच पर उठे सवाल

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रांची: बोकारो की 18 वर्षीय युवती की गुमशुदगी के मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सख्ती दिखाते हुए बोकारो के पुलिस अधीक्षक (एसपी) से जवाब तलब किया। वर्चुअल सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि सनहा दर्ज होने के बाद प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने में 10 दिन की देरी क्यों हुई और दोषी थाना प्रभारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।

न्यायालय ने एसपी को निर्देश दिया कि वे 23 मार्च को सशरीर अदालत में उपस्थित होकर केस डायरी, जांच की अद्यतन स्थिति और अनुसंधान की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि जांच संतोषजनक नहीं पाई गई, तो मामले को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपा जा सकता है।

यह मामला न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष सुना गया। सुनवाई के दौरान बोकारो एसपी ने अदालत में दाखिल शपथ पत्र में संशोधन के लिए समय देने का आग्रह किया। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विनसेंट रोहित मार्की और शांतनु गुप्ता ने पक्ष रखा।

अदालत ने पूर्व सुनवाई में भी पुलिस से पूछा था कि युवती सात माह से अधिक समय से लापता है, उसकी बरामदगी के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए हैं और उसे कब तक खोजा जाएगा।

एसपी ने अदालत को बताया कि बोकारो और आसपास के तीन-चार स्थानों पर छापेमारी की गई है। एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है और उसका नार्को टेस्ट कराने की प्रक्रिया चल रही है।

दरअसल, मामले में युवती की मां ने हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की है। याचिका के अनुसार, युवती 31 जुलाई 2025 से लापता है और इस संबंध में पिंडराजोड़ा थाना में कांड संख्या 147/2025 दर्ज किया गया था।

परिजनों को 11 दिसंबर 2025 को एक कॉल आया था, जिसमें बताया गया कि युवती पुणे में है। इसके बाद पुलिस ने कॉल करने वाले युवक को पकड़ लिया। पूछताछ में उसने बताया कि युवती उसके दोस्त के पास पुणे में है।

पुलिस टीम युवती के पिता के साथ आरोपित युवक को लेकर ट्रेन से पुणे जा रही थी, लेकिन रास्ते में वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। इसके बाद से अब तक युवती का कोई सुराग नहीं मिल सका है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

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